जनजातीय विद्यार्थियों के अंग्रेजी संप्रेषण कौशल को मिलेगा बढ़ावा, 90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम की पहल

रायपुर, 16 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में जनजातीय अंचलों के महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के अंग्रेजी भाषा में संप्रेषण कौशल को मजबूत बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है।
इसी कड़ी में शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में संभाग स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाना और उच्च शिक्षा, रोजगार तथा व्यक्तित्व विकास के अवसरों को व्यापक बनाना है।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा आयुक्त श्रीमती रीता यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यशाला में बिलासपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों के 25 प्राचार्यों, 47 प्राध्यापकों और 17 अन्य प्रतिभागियों सहित कुल 89 लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं बिलासपुर संभाग के अपर संचालक ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उन्होंने इसे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। इसके बाद संप्रेषणात्मक अंग्रेजी प्रशिक्षण के राज्य स्तरीय सदस्य एवं संभागीय नोडल अधिकारी ने प्रशिक्षण की कार्ययोजना और उपयोगिता की जानकारी दी।
छात्रहित सर्वोपरि, अवकाश के दिनों में भी हो सकेंगी शैक्षणिक गतिविधियां
उच्च शिक्षा आयुक्त श्रीमती रीता यादव ने अपने संबोधन में छात्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में छात्राओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरत पड़ने पर रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। इसके लिए नियमानुसार प्रतिपूरक अवकाश की सुविधा भी दी जाएगी।
उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भाषा संबंधी दक्षता विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों का बेहतर लाभ उठाने में मदद कर सकती है।
90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम से निखरेगा अंग्रेजी कौशल
कार्यक्रम में डॉ. एम. एस. गुप्ता ने बताया कि छात्राओं के अंग्रेजी संप्रेषण कौशल को बेहतर बनाने के लिए 90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम की अनुशंसा की गई है। इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शुरू किया गया है।
स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सोमाली गुप्ता ने पाठ्यक्रम की रूपरेखा, शिक्षण पद्धति और प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को विद्यार्थियों की भाषा संबंधी दक्षताओं को विकसित करने के लिए प्रभावी शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराने पर जोर दिया गया। यह पहल जनजातीय विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



