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महासमुंद: 30 किलो गांजा तस्करी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की कोमाखान पुलिस ने सोमवार देर रात नशे के कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने टेमरी नाका के पास घेराबंदी कर एक कार से 30 किलो गांजा बरामद किया, जिसकी कीमत करीब 4.50 लाख रुपए आंकी गई है।

पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा गांजा ओडिशा से लाकर मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में खपाने की तैयारी थी।
कैसे हुआ खुलासा
कोमाखान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांजे की बड़ी खेप कार में छिपाकर महासमुंद जिले से गुजरने वाली है। इस सूचना पर थाना प्रभारी ने टीम गठित की और टेमरी नाका के पास बैरिकेड लगाकर वाहनों की चेकिंग शुरू की। इस दौरान एक डिजायर कार (क्रमांक एमपी 16 JZ 5735) को रोककर तलाशी ली गई। कार की डिक्की से दो बोरी बरामद हुई, जिनमें कुल 30 किलो गांजा मिला।
गिरफ्तार आरोपी
गाड़ी में सवार तीनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई—
कल्लू उर्फ कुलदीप यादव (38 वर्ष), निवासी झांसी (उत्तर प्रदेश)
अभिषेक राय (40 वर्ष), निवासी छतरपुर (मध्यप्रदेश)
पीयूष कुमार (41 वर्ष), निवासी छतरपुर (मध्यप्रदेश)
पुलिस ने गांजे के साथ कार, चार मोबाइल फोन और 5 हजार रुपए नकद भी जब्त किए।
पूछताछ में बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने यह गांजा ओडिशा के बालीगुड़ा क्षेत्र से राधे नाम के व्यक्ति से खरीदा था। इसके लिए उन्होंने एक लाख रुपए नकद भुगतान किया था। योजना यह थी कि गांजे को छतरपुर ले जाकर छोटे-छोटे पैकेट बनाकर अपने मोहल्ले और आसपास के क्षेत्रों में बेचा जाए। पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से इस काम में सक्रिय थे और छोटे स्तर पर गांजे की सप्लाई नेटवर्क चला रहे थे।
जब्त सामान
डिजायर कार (क्रमांक एमपी 16 JZ 5735)
कुल 30 किलो गांजा
चार मोबाइल फोन
5,000 रुपए नकद
कार के कागजात, इंश्योरेंस व पैन कार्ड
कानूनी कार्रवाई
तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की धारा 20(बी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गांजा तस्करी की इस चैन को तोड़ने के लिए आगे की जांच जारी है। ओडिशा से मध्यप्रदेश तक फैले इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
नशे का फैलता नेटवर्क
छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर लंबे समय से गांजा तस्करों के लिए सुरक्षित मार्ग माना जाता है। ओडिशा के बालीगुड़ा, कंधमाल और मलकानगिरी क्षेत्र गांजे की अवैध खेती के लिए कुख्यात हैं।

वहां से खेप मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों तक पहुंचाई जाती है। हाल के महीनों में पुलिस ने लगातार कार्रवाई कर कई तस्करी के मामलों का भंडाफोड़ किया है, लेकिन इसके बावजूद तस्करी की घटनाएं जारी हैं।
गांव-शहर तक पहुंच रही सप्लाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तस्कर बड़े पैमाने पर गांजा खरीदकर शहरों में छोटे-छोटे पैकेट बनाकर बेचते हैं। इससे यह आसानी से युवाओं तक पहुंच रहा है।

यही वजह है कि गांजे की लत युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही है और अपराध के मामलों में भी इजाफा हो रहा है। इस मामले में तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। फिलहाल कोमाखान पुलिस गांजे की सप्लाई करने वाले ओडिशा के सप्लायर और छतरपुर में इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

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