गरियाबंद। नेशनल हाईवे-130C पर एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुवार को राजापड़ाव से पहले हाईवे के एक मोड़ पर जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप की इनोवा कार और सामने से आ रही मालवाहक पिकअप के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इनोवा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, हालांकि राहत की बात यह रही कि जिला पंचायत अध्यक्ष हादसे में सुरक्षित बच गए।

गरियाबंद जाते वक्त सामने से आई पिकअप जानकारी के मुताबिक गौरी शंकर कश्यप अपने निजी निवास से इनोवा वाहन में सवार होकर राजधानी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान राजापड़ाव से पहले हाईवे के मोड़ पर गरियाबंद की दिशा से आ रही एक मालवाहक पिकअप सामने से उनकी इनोवा से जा भिड़ी।हादसे के बाद वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है। हादसा जुगाड़ और मैनपुर थाना क्षेत्र के बीच का बताया जा रहा है।

एक हादसा टला, लेकिन बड़ा सवाल फिर सामने आया इस दुर्घटना ने केवल एक वीआईपी वाहन की क्षति का मामला नहीं उठाया, बल्कि NH-130C के उस हिस्से की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां बारिश के मौसम में दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ने की बात सामने आती रही है।स्थानीय लोगों के अनुसार झरियाबहारा से धूर्वागुड़ी के बीच करीब 40 किलोमीटर का हिस्सा कई जगह घुमावदार और हादसों के लिहाज से संवेदनशील है। अभयारण्य क्षेत्र होने के कारण सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी बाधाओं का मुद्दा भी लंबे समय से चर्चा में है।बारिश के दौरान सड़क पर फिसलन, घुमावदार मोड़ और सामने से आने वाले वाहनों की सीमित दृश्यता जैसी परिस्थितियां जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। ऐसे में सवाल यह है कि लगातार दुर्घटनाओं की खबरों के बावजूद इस मार्ग पर सड़क सुरक्षा के स्थायी इंतजाम कब होंगे?

महीने भर पहले रेंजर की मौत ने भी झकझोरा थाइसी हाईवे पर जुलाई में ध्रुवागुड़ी और बुढ़घेलटप्पा के बीच वन विभाग की बोलेरो और ट्रक के बीच भीषण आमने-सामने की टक्कर हुई थी। इस हादसे में देवभोग वन विभाग के रेंजर अश्विनी दास मिर्चुलिया की मौत हो गई थी, जबकि वाहन में सवार अन्य लोग घायल हुए थे।अब जिला पंचायत अध्यक्ष की गाड़ी के साथ हुई दुर्घटना ने एक बार फिर इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

हादसों की श्रृंखला के बाद अब कार्रवाई की जरूरतNH-130C इस इलाके के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। रोजाना छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही के बीच यदि किसी संवेदनशील हिस्से में बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं, तो केवल वाहन चालकों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा।जरूरत है कि संबंधित विभाग इस पूरे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराए, दुर्घटना संभावित मोड़ों की पहचान करे, पर्याप्त संकेतक और चेतावनी बोर्ड लगाए तथा जहां संभव हो वहां सड़क की चौड़ाई, दृश्यता और अन्य सुरक्षा उपायों पर ठोस निर्णय लिया जाए।

आज गौरी शंकर कश्यप बाल-बाल बच गए, लेकिन सवाल यही है—अगली बार किसकी बारी होगी?यह हादसा एक चेतावनी है कि NH-130C के संवेदनशील हिस्सों में सड़क सुरक्षा को अब केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जमीनी प्राथमिकता बनाने की जरूरत है।