लाखों की लागत से बना सार्वजनिक शौचालय खंडहर में तब्दील

देवभोग। ग्राम पंचायत दीवानमुड़ा में आम जनता की सुविधा के लिए लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये की लागत से बनाया गया सार्वजनिक शौचालय बदहाली का शिकार है। सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्मित इस शौचालय की मौजूदा स्थिति को लेकर निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने और लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराती है। लेकिन दीवानमुड़ा में शौचालय की जर्जर स्थिति से योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस सुविधा का लाभ आम लोगों को मिलना चाहिए था, उसकी बदहाली के कारण उद्देश्य प्रभावित होने की आशंका है।
निर्माण के बाद रखरखाव पर सवाल
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, शौचालय का निर्माण लोगों की सुविधा के लिए कराया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर नियमित देखरेख और मरम्मत की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। समय-समय पर रखरखाव किया जाता, तो भवन को इस स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता था।
गुणवत्ता की जांच जरूरी
करीब 3.50 लाख रुपये की लागत से निर्मित शौचालय का जर्जर होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की जरूरत को रेखांकित करता है। हालांकि, निर्माण में अनियमितता या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके लिए तकनीकी जांच, निर्माण संबंधी दस्तावेजों और खर्च की गई राशि का परीक्षण जरूरी होगा।
अधिकारियों के निरीक्षण पर भी उठे सवाल
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग और पंचायत की ओर से निगरानी तथा नियमित रखरखाव आवश्यक है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि निर्माण के बाद शौचालय का कितनी बार निरीक्षण किया गया और इसकी बदहाल स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए।
निष्पक्ष जांच और मरम्मत की मांग
ग्राम पंचायत दीवानमुड़ा के सार्वजनिक शौचालय की वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराए जाने की जरूरत है। संबंधित विभाग को निर्माण पर खर्च हुई राशि, कार्य की गुणवत्ता, वर्तमान उपयोगिता और रखरखाव की स्थिति की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर शौचालय की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं और ग्रामीणों को इस सार्वजनिक सुविधा का लाभ कब तक मिल पाता है।



