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सुखानदी में अवैध रास्ता निर्माण पर बवाल, किसानों के विरोध के बाद काम बंद

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फिंगेश्वर।फिंगेश्वर स्थित सुखानदी में रेत उत्खनन के लिए कथित तौर पर बिना अनुमति रास्ता बनाने का मामला सामने आया है। किसानों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेत ठेकेदार द्वारा नदी के जल प्रवाह को रोककर रेम (रास्ता) का निर्माण किया जा रहा था।

नदी के किनारे की पिचिंग तोड़ने, गहरी खुदाई करने और काजू के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। शिकायत के बाद प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया।

गणेशपुर में खदान स्वीकृत, फिंगेश्वर में निर्माण पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, रेत खदान फिंगेश्वर से लगभग तीन किलोमीटर दूर गणेशपुर क्षेत्र में स्वीकृत है। इसके बावजूद रेत निकालने के लिए फिंगेश्वर से मणिकंचन जाने वाले मार्ग पर काजू बगीचे के पास सुखानदी के किनारे रास्ता बनाया जा रहा था। किसानों का आरोप है कि इस दौरान नदी के जल प्रवाह को बाधित किया गया और किनारे की पिचिंग को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। रास्ता निर्माण के लिए काजू के पेड़ों को काटे जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

शिकायत पर पहुंचे एसडीएम, ठेकेदार से मांगे दस्तावेज

मामले की शिकायत फिंगेश्वर तहसीलदार और एसडीएम से की गई। सूचना मिलने पर एसडीएम विशाल महाराणा अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

उन्होंने संबंधित ठेकेदार से खदान की स्वीकृति और निर्माण की अनुमति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि जब खदान गणेशपुर में स्वीकृत है, तो फिंगेश्वर क्षेत्र में नियमों के विपरीत नदी के भीतर रास्ता बनाना स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने नदी के किनारे हुई खुदाई, क्षतिग्रस्त पिचिंग और आसपास हुए नुकसान को लेकर नाराजगी जताई। साथ ही संबंधित पक्ष को पूर्व की स्थिति के अनुरूप निर्माण बहाल करने के निर्देश दिए और नियमों का पालन नहीं करने पर विधिसम्मत कार्रवाई की चेतावनी दी। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद काम रुकवा दिया गया।

किसानों को बाढ़ और फसल नुकसान की आशंका

किसानों का कहना है कि नदी के किनारे और पिचिंग से छेड़छाड़ के कारण भविष्य में बाढ़ का पानी खेतों में घुस सकता है। इससे फसलों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने के साथ ही आसपास की सीसी सड़क भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा है।

ग्रामीणों ने सुखानदी के प्राकृतिक प्रवाह और उसके अस्तित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।

मौके पर किसानों और रेत उत्खनन से जुड़े लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई। किसानों ने संबंधित लोगों पर धमकाने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

घटनास्थल पर फिंगेश्वर किसान सेवा समिति के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित थे। अब ग्रामीणों की मांग है कि नदी को हुए नुकसान की जांच कराई जाए, क्षतिग्रस्त हिस्सों को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाए और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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