चांदनी रात में चौकसील पहाड़ी पर सजेगा आस्था का मेला, 25 अक्टूबर को उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब
उदंती के घने जंगलों के बीच देवगढ़धाम चौकसील में तीन दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की तैयारी तेज, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से पहुंचते हैं श्रद्धालु

गरियाबंद | उदंती के घने जंगलों के बीच देवगढ़धाम चौकसील में तीन दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की तैयारी तेज, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से पहुंचते हैं श्रद्धालु
गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड क्षेत्र में स्थित देवगढ़धाम चौकसील पहाड़ी एक बार फिर आस्था, आदिवासी परंपरा और लोक संस्कृति के अनूठे संगम की साक्षी बनने जा रही है। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 25 अक्टूबर, रविवार को यहां पारंपरिक शरद पुन्नी मेला आयोजित किया जाएगा। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच स्थित इस धार्मिक स्थल पर हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।
चौकसील पहाड़ी पर आयोजित होने वाला यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, सामुदायिक एकता और पारंपरिक आस्था का भी प्रतीक है। चांदनी रात में प्राकृतिक वातावरण के बीच होने वाले इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। देवगढ़धाम बारहपाली समिति चौकसील के नेतृत्व में तैयारियां की जा रही हैं।
तीन दिनों तक गूंजेगी पूजा-अर्चना और लोक संस्कृति की धुन
आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत 24 अक्टूबर, शनिवार को देवी-देवताओं के आगमन और विशेष पूजा-अर्चना के साथ होगी। दोपहर 1 बजे से चौकसील गढ़िया माता, कुलेश्वरी माता, टंगिया कोटलो डुमा, चार चौरासी गादी माता सहित पहाड़ी के देवी-देवताओं की पूजा की जाएगी। शाम 4 बजे विभिन्न स्थानों से देवी-देवताओं का आगमन एवं स्थापना होगी। इसके बाद झांकर, पुजारी, बैगा और सिरहा अतिथियों का स्वागत तथा रात 8 बजे सामाजिक प्रमुखों का उद्बोधन और विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी।
25 अक्टूबर को निकलेगी देवी-देवताओं की शोभायात्रा
शरद पूर्णिमा के मुख्य दिन सुबह पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक मेले का आयोजन होगा। दोपहर 12 बजे आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ अतिथियों का स्वागत और उद्बोधन होगा। शाम 4 बजे देवी-देवताओं की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान आदिवासी समाज की परंपराओं के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
रात 9 बजे ग्राम जयपाटना (सरगीगुड़ा) के कलाकारों द्वारा प्रसिद्ध ओड़िया नाटक का मंचन किया जाएगा। इससे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ लोकनाट्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का रंग भी देखने को मिलेगा।
26 अक्टूबर को होगा समापन
तीन दिवसीय आयोजन का समापन सोमवार, 26 अक्टूबर को होगा। इस अवसर पर औपचारिक समापन, जोहार भेंट तथा देवी-देवताओं और अतिथियों की विदाई की जाएगी।
आस्था के साथ आदिवासी परंपरा को सहेजने की पहल
चौकसील का शरद पुन्नी मेला क्षेत्र की पारंपरिक धार्मिक पहचान से जुड़ा हुआ है। यहां झांकर, पुजारी, बैगा और सिरहा सहित पारंपरिक धार्मिक भूमिका निभाने वाले लोगों का मिलन भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ओडिशा से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा रही है।
आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष देवगढ़धाम बारहपाली समिति चौकसील द्वारा 13वें वर्ष के उपलक्ष्य में जिला स्तरीय दशहरा पर्व, शरद पुन्नी मेला तथा झांकर-पुजारी-बैगा-सिरहा मिलन सम्मेलन सह पूजन समारोह आयोजित किया जा रहा है।
दुर्गम रास्तों के बीच ग्रामीणों का सामूहिक प्रयास
पहाड़ी तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण आवागमन चुनौतीपूर्ण रहता है। ग्रामीण अपने स्तर पर रास्ते के निर्माण और आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं। इसके बावजूद लोगों की आस्था और सामूहिक सहयोग इस मेले को विशेष पहचान देते हैं।
आयोजन की तैयारियों में बारहपाली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले कोयबा, साहेबिनकछार, इंदागांव, तौरेंगा, जांगड़ा, अमाड़, मोतीपानी और रक्सापथरा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण एवं श्रद्धालु सहयोग कर रहे हैं।
संरक्षक टीकम सिंह नागवंशी, अध्यक्ष बैजनाथ नेताम, संचालक टीकम सिंह मांझी तथा मंगलसिंह सोरी, खेलसिंह मरकाम, तिरथ नाग, नरेश कुमार नागेश, अर्जुन सिंह नायक, हरिश मांझी, हेमंत ध्रुव, देवीराम जानी, कुंवर सिंह ओटी, मधुसिंह ओटी सहित क्षेत्र के ग्रामीण आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
आयोजकों ने आसपास के क्षेत्रों सहित छत्तीसगढ़ और ओडिशा के श्रद्धालुओं से इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होने की अपील की है।
चौकसील का शरद पुन्नी मेला प्रकृति की गोद में आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का ऐसा आयोजन है, जहां पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास दिखाई देता है।



