
रायपुर । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में पीएम योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। भारत सरकार शिक्षा के विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगी। पीएम योजना के द्वितीय चरण में छत्तीसगढ़ की अपेक्षाओं के अनुरूप अधिक से अधिक स्कूलों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के 211 स्कूलों में पीएम योजना की आज शुरूआत की गई है। जिसके तहत 2-2 करोड़ प्रति स्कूल राशि खर्च कर स्कूलों को बड़े शहरों और विश्व स्तर के आदर्श स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राईजिंग इंडिया’ प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत की परिकल्पना का प्रमुख आधार है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। कार्यक्रम में सांसद सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा, गुरू खुशवंत साहेब, मोतीलाल साहू, राज्य औषधि बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रामप्रताप सिंह भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम के पहले अतिथियों ने आयोजन स्थल पर पीएम योजना सहित शिक्षा से संबंधित योजनाओं पर लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। केन्द्रीय मंत्री ने केन्द्रीय विद्यालय डोंगरगढ़ में डिजिटल लाइब्रेरी, रामानुज मैथ्स पार्क और नवोदय विद्यालय में वर्चुअल रियलटी का शुभारंभ किया। पीएम योजना में छत्तीसगढ़ के चयनित 211 स्कूलों में एलीमेन्ट्री स्तर पर 193 और सेकेंडरी स्तर पर 18 स्कूल शामिल हैं। विद्यार्थियों को इन स्कूलों में आईसीटी, डिजिटल क्लास रूम के माध्यम से प्रदान की जाएगी। इन स्कूलों के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा एवं स्थानीय उद्योगों के साथ इंटर्नशिप, उद्यमिता के अवसरों से जोड़ा जाएगा। अतिथियों ने उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि स्टॉलों के अवलोकन के दौरान उनकी विद्यार्थियों से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और ज्ञान का स्तर देखकर मैं यह कह सकता हूं कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी बच्चे दूसरे राज्यों के बच्चों से काफी आगे हैं। यही छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी है। बच्चों ने मुझसे आटोग्राफ भी लिया। चर्चा के दौरान बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग का रिफलेक्शन देखने को मिला। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा के विकास के लिए केन्द्र सरकार हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में बागवानी हो, बच्चों को पोषण के साथ खेलकूद और योगा भी सिखाया जाए ताकि बच्चे स्वस्थ्य रहें। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में कक्षा 8वीं तक बच्चों को मातृभाषा और स्थानीय भाषा में शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए केन्द्र सरकार सरकारी चैनल शुरू करेगी, जिसमें छत्तीसगढ़ी सहित हल्बी, गोंडी, भतरी, सरगुजिया जैसी भाषाएं भी शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी सहित सभी स्थानीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। नई शिक्षा नीति में कौशल विकास और टेक्नालॉजी पर विशेष जोर दिया गया। 6वीं से 12वीं तक सभी विद्यार्थियों को भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, आर्ट, स्पोर्टस, पेंटिंग, संगीत-नृत्य जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को 10 दिनों का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा, जिसमें बच्चों को जंगल, एयरपोर्ट, अबूझमाड़ क्षेत्र, टेक्सटाइल्स, पंडवानी जैसे लोककलाओं आदि को नजदीक से जानने और समझने का मौका मिलेगा। यह सभी क्षेत्र अपने आप में ओपन यूनिवर्सिटी हैं। उन्होंने 2036 में होने वाले ओलंपिक खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी तैयारी छत्तीसगढ़ से प्रारंभ हो, यहां के खिलाड़ी 10 प्रतिशत मेडल लेकर आएं। हर स्कूल में खेल का मैदान हों, खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित हो। उन्होंने कहा कि बच्चे स्वयं एंकरिंग कर अपने गांव और उनकी विशेषताओं पर एक मिनट की रील बनाएं।
केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र 2025-26 से बोर्ड परीक्षा देने के दो अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में नवाचार पर जोर दिया गया है। इसका पहला उद्देश्य बच्चों को परीक्षा के तनाव से मुक्त करना है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है।