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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के 128 गांवों की महाग्रामसभा में उमड़ा जनसैलाब, जल-जंगल-जमीन और विस्थापन के मुद्दे पर उठी आवाज

मैनपुर के कोकड़ी गांव में जुटे हजारों ग्रामीण, विधायकों ने विस्थापन और मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा उठाया; 60 दिनों में संकल्पों पर कार्रवाई की मांग

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मैनपुर के कोकड़ी गांव में जुटे हजारों ग्रामीण, विधायकों ने विस्थापन और मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा उठाया; 60 दिनों में संकल्पों पर कार्रवाई की मांग

 

मैनपुर। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आदिवासियों के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, विस्थापन और मूलभूत सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। गरियाबंद जिले के मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर राजापड़ाव-गौरगांव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में शनिवार को जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के तत्वावधान में महाग्रामसभा का आयोजन किया गया। इसमें उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 128 गांवों से हजारों की संख्या में महिला-पुरुष, जनप्रतिनिधि, सामाजिक प्रमुख, मांझी, गायता और पुजारी शामिल हुए।

 

महाग्रामसभा की शुरुआत सुबह 11 बजे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना के साथ हुई। सभा की अध्यक्षता हिम्मत सिंह नेताम ने की। इस दौरान ग्रामीणों ने वन अधिकार, विस्थापन, आवागमन में आ रही परेशानियों, वनग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने और बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए।

 

60 दिनों में संकल्पों पर कार्रवाई की मांग

 

महाग्रामसभा में जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम ने ग्रामसभा में पारित प्रस्तावों को पढ़कर सुनाया। सभा में इन प्रस्तावों को विधानसभा, लोकसभा, जिला एवं जनपद स्तर पर उठाकर शासन से उनका अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए 60 दिनों का समय निर्धारित करने की बात कही गई।

 

समिति की ओर से कहा गया कि निर्धारित अवधि में मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में पेसा अधिनियम के तहत ग्रामसभा असहयोग का रास्ता अपना सकती है। इस दौरान धमतरी और गरियाबंद जिले के विभिन्न गांवों से पहुंचे सामाजिक प्रमुखों एवं जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखा और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।

 

विधायक जनक ध्रुव बोले—हम जंगल छोड़कर कहां जाएं?

 

महाग्रामसभा में शामिल बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज के पुरखे हजारों वर्षों से जंगलों में निवास करते आए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि वे जंगल छोड़कर आखिर कहां जाएंगे?

 

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और आजीविका का प्रमुख आधार हैं। आदिवासियों को उनके पारंपरिक निवास क्षेत्र से अलग करना उनकी संस्कृति और अस्तित्व से जुड़ा गंभीर विषय है।

 

विधायक ध्रुव ने क्षेत्र में शाम 6 से 7 बजे के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाका लगाए जाने से उत्पन्न परेशानियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र के हजारों आदिवासियों और ग्रामीणों को इलाज तथा आपातकालीन परिस्थितियों में आवागमन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

 

उन्होंने विस्थापन के नाम पर ग्रामीणों पर दबाव बनाए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पीढ़ियों से क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

 

विधायक ने कहा कि वे पहले भी क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में उठाते रहे हैं और आगे भी ग्रामीणों के अधिकारों की आवाज बुलंद करते रहेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों को आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

 

विधायक अंबिका मरकाम ने वन विभाग और प्रशासन से उठाए सवाल

 

महाग्रामसभा में सिहावा विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम ने भी आदिवासी ग्रामीणों के अधिकारों और विस्थापन के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पीढ़ियां इस जंगल क्षेत्र में निवास करती आई हैं। स्थानीय समुदायों ने जंगल, जमीन और वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

उन्होंने स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को उनके पारंपरिक निवास क्षेत्र से बेदखल करने के प्रयासों पर आपत्ति जताते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया।

 

विधायक मरकाम ने क्षेत्र के लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि संगठन और एकता में ही शक्ति है। अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा।

 

उन्होंने ग्रामीणों को आगाह किया कि एकता को कमजोर करने के प्रयास हो सकते हैं, लेकिन आपसी मतभेदों में उलझने के बजाय सभी को मिलकर अपने मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र की जनता के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

 

बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क की समस्याएं भी उठीं

महाग्रामसभा में संरक्षक मनोज साक्षी, अर्जुन नायक, टीकम नागवंशी, आदिवासी नेता महेंद्र नेताम, पुरन मेश्राम, दैनिक राम मंडावी, दीनाचंद मरकाम सहित क्षेत्र के कई वरिष्ठ आदिवासी नेताओं ने अपने विचार रखे।

 

वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। कई गांवों में बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या है। शिक्षा एवं आवागमन से जुड़ी परेशानियों को लेकर भी ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

 

उन्होंने वनग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग उठाते हुए कहा कि क्षेत्र के निवासी पीढ़ियों से जंगलों के बीच रहकर प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण में योगदान देते आए हैं।

 

वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और वन्यप्राणियों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर ठोस निर्णय लेने तथा संगठित रहने की अपील की।

 

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई महाग्रामसभा

 

कार्यक्रम में बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, सिहावा विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम, एसडीएम नेहा भेड़िया और नायब तहसीलदार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

 

महाग्रामसभा में जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम, महासचिव रेवा देवदास, सचिव माखन सलाम, धनेश मरकाम, मनोज साक्षी, हिम्मत सिंह नेताम, टीकम नागवंशी, महेंद्र नेताम, दैनिक राम मंडावी, अर्जुन नायक, मंगल सिंह नाग, रवि नेताम, लक्ष्मण सिंह मरकाम, गोकुल नेताम, ईश्वरी नेताम, बुधराम मांझी, संतोष मरकाम, शंकरलाल नेताम, चिमनलाल, कृष्णा मंडावी और दीनाचंद मरकाम सहित विभिन्न गांवों के सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

 

इसके अलावा निरमती नेताम, दुखियाबाई मरकाम, देवी सिंह नेताम, रमुला मरकाम, फूलमती नेताम, बुधुराम मरकाम, फूलचंद मरकाम, रेवती यादव, रामकृष्ण ध्रुव, गेंदु यादव और डीके यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।

 

महाग्रामसभा का संचालन पुरन मेश्राम ने किया। सुबह 11 बजे शुरू हुआ आयोजन शाम 5 बजे तक चला।

 

आदिवासी अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर संघर्ष तेज करने के संकेत

 

ग्राम कोकड़ी में आयोजित इस महाग्रामसभा में उठे मुद्दों से स्पष्ट है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के ग्रामीण विस्थापन, आवागमन, वन अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी मांगें शासन-प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं।

 

महाग्रामसभा में शामिल जनप्रतिनिधियों और सामाजिक नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज का जंगल से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है। ऐसे में क्षेत्र के निवासियों के अधिकारों की रक्षा, वन संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता जैसे विषयों पर शासन-प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

 

अब महाग्रामसभा में पारित प्रस्तावों पर शासन-प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और ग्रामीणों की मांगों पर किस तरह कार्रवाई होती है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजर रहेगी।

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