
देश में बहुत से राज्य हैं। हर पांच साल में चुनाव होते हैं और राज्यों के सीएम बदल जाते हैं। आजादी के बाद से सैकड़ों सीएम अब तक बदल गए हैं। बहुत सारे सीएम को तो जनता उनके गद्दी से उतरते ही भूल जाती है। कुछ सीएम को कुछ बरस उनके किसी काम के लिए याद किया जाता है। ऐसे सीएम बहुत ही कम होंगे जिन्हें जनता बरसों याद करती है। जब भी उनका जिक्र होता है तो उसकी तारीफ की जाती है। हां ये एक ऐसा सीएम हुआ जिसने वह काम किया जो कोई कर नहीं पाया।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ऐसे ही सीएम हैं, यूपी में अब तक बीस सीएम हो चुके हैं. इनमें ऐसे सीएम कम है जिसे उसके ऐतिहासिक काम के लिये याद किया जाए।सबसे कठिन काम करने के लिए याद किया जाए। आने वाले समय में यहां के वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ को जनता सबसे कठिन काम करने के लिए याद करेगी क्योंकि योगी ने वह काम किया है जो कोई सीएम कर नहीं सका है. क्योंकि सारे सीएम तो मानते यही थे कि यूपी को माफिया व डान से मुक्त कराया ही नहीं जा सकता।
यही वजह है यूपी में उनके समय में अपराध नियंत्रण के काम हुए हैं लेकिन किसी सीएम ने विधानसभा में यह नहीं कहा कि माफिया को मिट्टी में मिला दिया जाएगा। योगी ने ऐसा कहा ही नहीं करके भी दिखा दिया। यूपी के दो माफिया ही ऐसे थे जिनकों मिट्टी में मिलाने की कोई सोच नहीं सकता था। लेकिन योगी आदित्य नाथ के शासनकाल में अतीक अहमद के बाद मुख्तार अंसारी भी मिट्टी मे मिल गया है। तो इसका श्रेय योगी आदित्यनाथ को जाता है।
एक वक्त था जब यह दोनों माफिया किसी न किसी पार्टी से विधायक व सांंसद हुआ करते थे और शासन प्रशासन इनकी ओर नजर उठाकर नहीं देख पाता था, इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज नहींं होते थे, होते तो कोई गवाही नहींं देता था। किसी मामले में दोनों को कोई जज सजा नहीं सुना सका। ऐसे दोनाे माफिया का खात्मा तो कानूनी तौर पर हो नहीं सकता था।अतीक अहमद का खात्मा तो गैरकानूनी तरीके से ही हो सकता था और वैसे ही हुआ। उसकी मौत पर यूपी की जनता को एक बड़े माफिया से छुटकारा मिला था।
गुरुवार को एक माफिया मुख्तार अंसारी की हार्ट अटैक से मौत होने की खबर है। कितनी अजीब बात है कि जिस माफिया के डर से लोगों को हार्ट अटैक आ जाता था,उसकी मौत योगी शासनकाल में हार्ट अटैक से हो गई। इसकी मौत के बाद यूपी की जनता को सबसे ज्यादा खुशी हो रही होगी कि चलाे जिन माफिया को कोई सरकार मिटा नहीं सकी थी, वह योगी के समय मिट्टी में मिला दिए गए। वही पुलिस प्रशासन, वही अधिकारी, वही व्यवस्था और योगी के समय दोनों माफिया खत्म हो गए।
इसका मतलब क्या है, इसका मतलब है कि मुखिया में दम होना चाहिए माफिया को समाप्त करने का तो बड़े से बड़ा माफिया मिट्टी मे मिलाया जा सकता है। हर राज्य में ऐसे दो चार माफिया मिल जाएंगे। वह होते हैं इसलिए कि उनका सत्तारुण दल का संरक्षण मिलता है। सत्ता का संरक्षण मिलने पर ही ये एक दिन अपने राज्य के अतीक अहमद व मुख्तार अंसारी बन जाते हैं। सरकार से बड़े हो जाते हैं,कानून से बड़े हो जाते हैं। कोई योगी आदित्य नाथ आता है तो इनको मिट्टी में मिलाता है।
कोई भी जन्म से योगी आदित्यनाथ नहीं होता है, योगी आदित्य नाथ जनता व राज्य के क्ल्याण के लिए बनना पड़ता है। योगी आदित्यनाथ भी चाहते तो यूपी के अन्य सीएम की तरह इनके सहयोग से चुनाव जीतकर शासन चला सकते थे।तब वह भी अखिलेश व मायावती की तरह सामान्य सीएम रह जाते। कुछ बरस बाद उनको भुला दिया जाता। आज योगी आदित्यनाथ को जनता माफिया के काल के काल के रूप में जानती है और आने वाले बरसों में भी इसी रूप में याद करेगी।
जब योगी को याद किया जाएगा तो यही कहा जाएगा कि योगी ने कहा, माफिया को मिट्टी में मिला दिया जाएगा और मिला भी दिया। हर राज्य में जनता ऐसा ही सीएम चाहती है जिससे माफिया व अपराधी डरें। हर रा्ज्य में जनता को ऐसा सीएम नहीं मिलता है क्योंकि सीएम तो सब बनना चाहते हैं लेकिन योगी आदित्यनाथ जैसा सीएम कोई बनना नहीं चाहता।