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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मांदर की थाप पर किया कर्मा नृत्य, जनजातीय संस्कृति और शिक्षा पर दिया जोर

रायगढ़ के सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव का आयोजन, जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर मुख्यमंत्री ने दिया जोर

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रायपुर, 16 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपनी परंपराओं के माध्यम से दी है, जो आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री श्री साय रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भगवान करम देव तथा भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

समारोह में जनजातीय संस्कृति की मनोहारी छटा देखने को मिली। कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे और महिला-पुरुषों के साथ पारंपरिक कर्मा नृत्य किया। मांदर की थाप और लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री की सहभागिता से उपस्थित समाजजनों में उत्साह का माहौल रहा। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर उनका स्वागत किया।

जनजातीय महापुरुषों का बलिदान हमारी अमूल्य विरासत

मुख्यमंत्री श्री साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया था। वहीं, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आसीन होना पूरे समाज के लिए गर्व की बात है। छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। यह जनजातीय समाज के सम्मान और बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है।

शिक्षा से संवरेंगे जनजातीय युवाओं के भविष्य

मुख्यमंत्री ने युवाओं को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में सफलता हासिल करने का सबसे सशक्त माध्यम है। जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ कौशल विकास और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाकर युवा अपने परिवार और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

जनजातीय अंचलों में विकास योजनाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ अंचलों में रहने वाला कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, रोजगार मेलों और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़कर उनके लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

संस्कृति और परंपराओं को सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना का उत्सव है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने समाजजनों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाने का आह्वान किया।

राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखा है। समाज के वीर महापुरुषों के योगदान को व्यापक पहचान दिलाना और युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना आवश्यक है।

उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष श्री पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की प्राचीन परंपराओं, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला और प्रकृति से जुड़े गोत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

महोत्सव में पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर सामूहिक कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। पूरे आयोजन में जनजातीय लोकसंस्कृति, सामाजिक एकता, प्रकृति के प्रति आस्था और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देखने को मिला।

mahipal sao

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। इसके पश्चात पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर… More »

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