एआईएसओ संगठन ने सांसद को सौंपा मांगपत्र
मुद्दा संसद में उठाया जाकर निकाला जाए स्थाई समाधान

दुर्ग। राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्टर्ड एआईएसओ संगठन पीएसीएल (पर्ल्स) निवेशकों की लड़ाई विगत 2015 से ब्लॉक,जिला,राज्य सहित राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली के जंतर मंतर हो या रामलीला मैदान तथा कानूनी रूप से निरंतर संघर्षरत है,
आपको विदित हो पर्ल्स ग्रुप ऑफ कंपनीज सन 1983 से पूरे देश भर में अपनी विभिन्न योजनाएं चला रही थी ।
इसी क्रम में सन 1996 से पीएसीएल लिमिटेड के नाम से रियल एस्टेट एवं भारत में बंजर भूमि को विकसित करने के प्लान पर काम कर रही थी। जो कि जयपुर राजस्थान से रजिस्टर्ड एवं MCA (मिनिस्ट्री ऑफ कंपनी अफेयर्स) द्वारा मान्यता प्राप्त थी।
जिसे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कंपनी के कारोबार को सीआईएस (कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम) मानकर नोटिस जारी किया था। कंपनी की अपील रिट याचिका संख्या 6735/99 एवं 6747/99 के अनुसार दिल्ली हाई कोर्ट ने 03/03/2003 को सेबी के नोटिस को रद्द कर दिया था।
तथा राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 28/11/2003 का निर्णय भी कंपनी के पक्ष में था। जिसके बाद सेबी द्वारा कंपनी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर सिविल अपील 6753–6754/2004 याचिका में कंपनी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाने के कारण माननीय उच्चतम न्यायालय ने 16/12/2013 को सेबी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था। पीएसीएल कंपनी की योजना से निवेशकों को लाभ मिल रहा था तथा करोड़ों एंप्लॉई व फील्ड वर्कर कार्यरत थे ।
2014 में केंद्र सरकार द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अधिकार क्षेत्र का दायरा बढ़ाया गया। सेबी ने इन्ही अधिकारों का प्रयोग करते हुए 22 अगस्त 2014 को कंपनी के सारे कारोबार, बैंक खाता प्रतिबंधित कर सारी संपत्ति जप्त कर लिया ।
जिसके बाद देश भर के पीएसीएल निवेशकों की निवेशित राशि मिलना बंद हों गई। जो कि सेबी के रिपोर्ट अनुसार देश भर के 5.85 करोड़ निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपए
जिसमें छत्तीसगढ़ के लगभग 10 लाख निवेशकों का 1200 करोड़ तथा दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के लगभग 3.5 लाख निवेशकों का लगभग 250 करोड़ रूपए शामिल हैं।
कंपनी ने अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा साथ ही निवेशकों की समस्या को देखते हुए AISO संगठन ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना वकील प्रशांत भूषण को हायर किया जिसके बाद माननीय उच्चतम न्यायालय ने निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए 2 फरवरी 2016 को अंतरिम आदेश के रुप में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा जी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर जप्त सुधा संपतियों को नीलाम कर निवेशकों का पैसा संभवतः 6 माह के अंदर वापिस करने का आदेश दिया। परंतू लोढ़ा कमेटी द्वारा इन साढ़े 8 वर्षों में 19,000 तक जमा राशि वाले 20.85 लाख निवेशकों को 1021 करोड़ रुपए ही वापस कर पाएं हैं जो कि कुल निवेशकों का मात्र 3% प्रतिशत ही है जिसमें भी अनेकों विषंगति ऐसे में निवेशकों को उनका खून पसीने की कमाई पाई पाई मिल पाना संभव नही दिख रहा।
सरकार की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा 2014 में जप्त 29 हजार प्रॉपर्टी का बाजार मूल्य 1.85 लाख करोड़ रुपए बताया गया था । जबकि वर्तमान में पीएसीएल की कुल 43,931 प्रॉपर्टी जप्त है। जप्त प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य के अनुसार पीएसीएल निवेशकों की देनदारी बहुत ही कम है फिर भी निवेशक दर दर भटकने मजबूर हैं।
संगठन द्वारा उपरोक्त समस्या समाधान हेतू अनेकों बार राष्ट्रीय स्तर पर लाखों की संख्या में धरना प्रदर्शन कर केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा गया। निवेशकों की समस्या संसद में रखकर केंद्र सरकार से समाधान करवाने के लिए प्रत्येक संसदीय सत्र में सभी सांसदों को ज्ञापन भीं दिया गया परंतू निवेशकों के हितार्थ न तो सांसदो के द्वारा और न ही केंद्र सरकार के द्वारा कोई पहल की गई जिससे निवेशकों में भारी निराशा व आक्रोश व्याप्त हैं।
पूरे देश के पीएसीएल निवेशकों ने केंद्र सरकार से समस्या समाधान की मांग को लेकर AISO संगठन के माध्यम से दुर्ग लोकसभा सांसद माननीय विजय बघेल जी को एक बार पुनः मांगपत्र सौंपा गया है यदि इस बार भी दुर्ग लोकसभा सांसद द्वारा संसद में मुद्दा नही रखा गया व PACL निवेशकों के हित में फिर कोई प्रयास नही करे या केंद्र सरकार द्वारा समाधान नहीं निकाला गया तो इसके विरोध में सभी पीएसीएल निवेशक 10 सितंबर 2024 से दिल्ली में अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन कर रोड जाम करेंगे साथ ही तत्पश्चात सांसदो के बंगले को भी घेरा जायेगा जिसमें किसी भी तरह की अप्रिय घटना की जिम्मेदारी इन सांसदों और केंद्र सरकार की होगी।
उक्त कार्यक्रम में AISO संगठन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रिय कार्यकारिणी सदस्य नरेश सगरवंशी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एच के देशमुख, समय लाल साहु, जिला अध्यक्ष आर के पटेल, पाटन ब्लाक अध्यक्ष देवनारायण साहु, निलेश पटेल, आर के अहिर, रामसुंदर यादव, बसंत कोसे , जगदीश बबांडे, ढालसिंह देवांगन, बिसहत साहु, रोशन साहु,लक्ष्मीपति राजु आदि के साथ सैकड़ों पीड़ित निवेशक उपस्थित हुए।