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नगरी बस स्टैंड: यहां यात्रा का मतलब शराब का सफर हैं ..

छिपली मोड व नगरी बस स्टैंड में संचालित मिनी भट्टी

धमतरी। अंधेर नगरी चौपट राजा इस कहावत से आप भलीभाँति अवगत होंगे कुछ ऐसा ही हाल नगरी नगर का भी है ऐसा कहना बिल्कुल सटीक होगा, जिसके जिम्मेवार कुछ मुट्ठी भर लोग है,

लेकिन समस्या पूरे नगर के लिए बनी हुई है, जी हाँ हम बात कर रहे हैं नगरी नगर स्थित बस स्टैन्ड व छिपली मोड की जो यात्रियों के लिए नहीं महज मदिरा प्रेमियों का ठिकाना बन कर रह गया है,

आज से कई वर्ष पहले आवागमन व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए नगरी बस स्टैन्ड को बजरंग चौक से धमतरी रोड स्थित चौराहा जो आज सौभाग्य से बस स्टैन्ड के नाम से विख्यात है

जहाँ आज पर्यंत विकास के नाम पर केवल ठेंगा ही मिला जिसका उल्लेख हमने अपने कई प्रकाशनों में किया, जिसकी स्थिति नगरवासी भलीभाँति जानते हैं,

कहानी वही हैं अंधेर नगरी! विकास से तो लोगों को पहले ही वंचित रखा, उसमें भी लोगों कि परेशानी बढ़ाने के लिए कुछ चंद लोग अपने निज स्वार्थ के लिए निजी दुकान की आड में धड़ल्ले से शराब की कालाबाज़ारी कर रहें हैं यह अभी से नहीं कई वर्षों से चलाया जा रहा हैं

जिसपर आज तक अंकुश नहीं लगाया जा सका, दुर्भाग्य इतना कि आज बस स्टैन्ड को नगर का बच्चा भी “छोटा भट्टी” या “मिनी ठेका” के नाम से जानता हैं, पहले भी बस स्टैन्ड में अंग्रेजी शराब कि दुकान हुआ करती थी जो कि लाइसेंस्ड थी,

जिसे बाद मे बंद किया गया उसी प्रकार बांधा पारा में भी संचालित थी जो लाइसेंस्ड थी उसे भी बाद में बंद किया गया एवं नगर में शहर के आखिरी छोर में शराब कि दुकान बनाई गई जिससे लोगों को समस्या न हो, जिसे मौका बना कर कुछ लोगों ने शहर के बीचों-बीच इसे अपने व्यवसाय के रूप में अपना लिया, और कई वर्षों से इसे चला रहे हैं सवाल यह हैं कि आखिर किसके संरक्षण में? क्या पुलिस अधिकारी या आबकारी अधिकारी ?

क्यूंकि यह बात तो तय हैं कि सभी को ऊपर से नीचे तक इसकी खबर हैं लेकिन सभी चुप्पी साध कर दर्शकों कि तरह किसी बड़ी घटना के होने का इंतेजार कर रहे हैं, जिस दिन शराब में मिलावट होगी व जान माल कि हानि होगी

तब काही जिम्मेवार लोगों के कान मे जूँ रेंगेगी, क्यूंकि वर्तमान में, यात्रियों के साथ असामाजिक व्यवहार तो अब वहाँ आम बात सी हो गई हैं, जिसे शासन-प्रशासन द्वारा देख कर भी अनदेखा किया जाता हैं, शाम को तो स्थिति ये होती हैं कि माताओं एवं बहनों का आवागमन जैसे वर्जित सा हो गया हो, वहाँ आसपास निवासरत लोगों का भी आना जाना दुर्गम हो गया हैं।

हाल ही में त्योहार के दिनों मे पुलिस रोज शहर में गश्त लगा रही हैं, लेकिन क्या इससे शराबियों पर कोई प्रभाव पड़ रहा हैं, जी नहीं! वो अब भी मजे से चंद पैसे ज्यादा देकर इस अवैध सेवा का लाभ उठा रहे हैं, और यात्री एवं नगरवासी अनावश्यक रूप से पीड़ित हो रहें हैं, हम दावा नहीं करते लेकिन इससे कहीं न कहीं भ्रष्टाचारी की बू आ रही हैं

कि अधिकारियों द्वारा इन व्यापारियों को संरक्षण प्राप्त हैं। वैसे तो हर सरकार शराबबंदी पर भाषणबाजी व वोट बटोरने का काम करती हैं, लेकिन ये बातें सिर्फ बातों मे ही रह जाती हैं, जो कि अब प्रतीत होता हैं कि बंद होने से रहा लेकिन यदि प्रशासन चाहे तो इन कालाबाज़ार चलाने वाले व्यापारियों पर अंकुश लगाया जा सकता हैं

उम्मीद हैं कि प्रशासन जल्द ही इस जगह को “छोटा भट्टी” से मुक्त करके प्रतीकात्मक रूप से नगर के सौभाग्य होने का दर्जा प्राप्त कराएगा।

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