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छत्तीसगढ़

दुर्ग का ‘मोर गांव मोर पानी महाभियान’ बना मिसाल: 15 दिनों में 32,000 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर रचा इतिहास

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रायपुर/दुर्ग: जल संरक्षण की दिशा में दुर्ग जिले ने एक ऐसी इबारत लिखी है जिसकी गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के नेतृत्व में शुरू हुआ “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब केवल सरकारी कागजों तक सीमित न रहकर एक व्यापक जन आंदोलन बन चुका है।

अभूतपूर्व कीर्तिमान: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत निर्मित घरों में जिले ने महज 15 दिनों के भीतर 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग ढांचों का निर्माण कर सभी को चौंका दिया है। इस अभियान की शुरुआत 13 मार्च 2025 को हुई थी, जिसका उद्देश्य भूजल स्तर को सुधारना और भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

प्रशासनिक तालमेल और जनसहभागिता: जिला पंचायत सीईओ के समन्वय और मनरेगा के सहयोग से ग्रामीणों ने इस कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अभियान के पहले ही चरण में सिर्फ 2 घंटे के भीतर 1,764 सोक पिट बनाकर गोल्डन बुक में स्थान बनाया गया था।

संरचनाओं का विवरण: इस महाभियान के तहत केवल सोक पिट ही नहीं, बल्कि विविध प्रकार के जल संचयन कार्य किए गए हैं:

  • 18,014 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच
  • 6,676 सोक पिट
  • 5,875 कंटूर ट्रेंच
  • 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग
  • 48 ग्राम तालाब और कई अन्य संरचनाएं।

जिला प्रशासन ने इस सफलता का श्रेय ग्रामीणों के श्रमदान और उनकी जागरूकता को दिया है। “हर घर जल संचय” के इस संकल्प ने दुर्ग को जल संरक्षण का एक ग्लोबल मॉडल बना दिया है।


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