अबूझमाड़ के गांवों में सौर ऊर्जा से पहुंच रहा साफ पानी, नारायणपुर में 849 सोलर पंप स्थापित
371 गांवों और पारा-टोलों को पेयजल से जोड़ने का लक्ष्य, महिलाओं की पानी जुटाने की मशक्कत होगी कम

रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दुर्गम वनांचलों में अब सौर ऊर्जा ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पेयजल का सहारा बन रही है। जिन इलाकों में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था या ग्रामीण झिरिया के पानी पर निर्भर रहते थे, वहां अब सोलर ड्यूल पंप के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के संयुक्त प्रयासों से अबूझमाड़ सहित दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा का विस्तार किया जा रहा है।
राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों के गांवों और पारा-टोलों तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित करना है। इससे ग्रामीणों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिलने के साथ दूषित जल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल रही है।
371 गांवों तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य
नारायणपुर जिले की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, पथरीले इलाकों और बिखरी हुई बसाहटों के कारण हर घर तक पेयजल पहुंचाना बड़ी चुनौती रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए जिले के 371 गांवों एवं पारा-टोलों में कुल 1,064 सोलर ड्यूल पंप स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
क्रेडा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रयासों से अब तक 849 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। शेष पंपों की स्थापना का काम भी जारी है। इस योजना से जिले के दूरस्थ इलाकों में पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
बिजली पर निर्भरता कम, सौर ऊर्जा से चल रहे पंप
सोलर ड्यूल पंपों की खासियत यह है कि ये सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं। इससे बिजली की अनियमित आपूर्ति वाले और विद्युत सुविधा से वंचित क्षेत्रों में भी पेयजल व्यवस्था संचालित करने में मदद मिलती है।
नेलांगुर, पदमकोट, जाटलूर, उसेबेड़ा, हरबेल, कस्तुरमेंटा-2, धुरबेड़ा और गुमरका जैसे दुर्गम गांवों में पंप स्थापित होने से ग्रामीणों को घर के नजदीक पानी उपलब्ध होने लगा है। इससे पानी जुटाने में लगने वाला समय और श्रम कम हो रहा है।
महिलाओं को राहत, स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर
पेयजल सुविधा का सीधा लाभ ग्रामीण महिलाओं और परिवारों को मिल रहा है। पहले पानी लाने के लिए महिलाओं को घंटों मेहनत करनी पड़ती थी। अब इस काम में लगने वाला समय बचने से वे आजीविका संबंधी गतिविधियों, बच्चों की देखभाल और अन्य घरेलू कार्यों के लिए अधिक समय निकाल सकती हैं।
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से दूषित पानी के सेवन से होने वाली जलजनित बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं।
ग्रीन एनर्जी से ग्रामीण विकास को नई दिशा
नारायणपुर में सोलर ड्यूल पंप योजना दूरस्थ वनांचलों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। सौर ऊर्जा के उपयोग से दुर्गम क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ पारंपरिक बिजली आपूर्ति पर निर्भरता भी कम की जा रही है।
शेष पंपों की स्थापना पूरी होने के बाद जिले के निर्धारित 371 गांवों एवं पारा-टोलों में पेयजल सुविधा का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है। यह पहल स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, ग्रामीण जीवन में सुविधा और सतत विकास के प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ा रही है।



