खैर तस्करी का 120 करोड़ का सिंडिकेट बेनकाब, फर्जी बिलों से चलता था पूरा खेल

बसना। खैर लकड़ी की तस्करी को कागजों में वैध दिखाकर करोड़ों का कारोबार करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह पर महासमुंद पुलिस ने शिकंजा कस दिया है।
तकनीकी जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पिछले दो वर्षों में उड़ीसा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की तस्करी की।
अवैध कारोबार को वैध दिखाने के लिए 8 शेल कंपनियों से फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाते थे, जबकि रकम के लेनदेन और लेयरिंग के लिए 10 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
मामले में पुलिस ने फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले उड़ीसा के दो फर्म संचालकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को 14 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
एनओसी में कूटरचना से शुरू हुई जांच
मामला खैर लकड़ी के अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल की गई एनटीपीएस एनओसी में कथित कूटरचना से जुड़ा है।वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा की शिकायत पर थाना पिथौरा में अपराध दर्ज किया गया है।
इसमें 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के अवैध परिवहन सहित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और शासन को राजस्व नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है।
विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस को इस पूरे मामले के पीछे बड़े संगठित नेटवर्क के संकेत मिले। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के सिंडिकेट ने फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए अवैध कारोबार को कागजों में वैध दिखाने का तंत्र खड़ा किया था।
7 सितंबर 2026 को 81 लाख रुपए जब्त
पुलिस ने 7 सितंबर को मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने की तलाशी लेकर 81 लाख रुपए नकद जब्त किए थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क तक पहुंच बनाई।
पुलिस के अनुसार तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उड़ीसा से फर्जी कंपनियों का संचालन करने और नेटवर्क को फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने के आरोप में पारितोष मिश्रा उम्र 47, संचालक पीयूष इंटरप्राइजेज, बोलांगीर तथा अखिलेश सिंघल उम्र 52, संचालक सिंघल इंटरप्राइजेज, संबलपुर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
साथ ही वित्तीय ट्रेल की गहन जांच कर अवैध रकम के लेनदेन और उससे अर्जित संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस, वन विभाग और संबंधित वित्तीय एजेंसियों के समन्वय से गिरोह द्वारा अर्जित अवैध संपत्तियों की कुर्की राजसात की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।



