
रायपुर । राजिम कुंभ कल्प 2026 के आयोजन से पहले ही टेंडर प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। गरियाबंद कलेक्टर कार्यालय की ओर से करीब 6 करोड़ रुपये के इवेंट मैनेजमेंट कार्यों के लिए इमरजेंसी में जारी की गई निविदा पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि इतने बड़े बजट के काम के लिए एजेंसियों को महज 4-5 दिन का ही समय दिया गया है।
राजिम कुंभ कल्प का आयोजन 1 से 15 फरवरी 2026 तक प्रस्तावित है। इसके लिए टेंडर 5 जनवरी को जारी हुआ और 7 जनवरी को अखबार में प्रकाशित किया गया। 8 जनवरी को प्री-बिड मीटिंग, 9 जनवरी को ऑनलाइन बोली जमा करने की अंतिम तारीख और 10 जनवरी को प्रेजेंटेशन के साथ उसी दिन टेंडर क्लोज कर दिया जाएगा। यानी करोड़ों के कार्य की पूरी प्रक्रिया कुछ ही दिनों में निपटाने की तैयारी है, जबकि सामान्य तौर पर टेंडर प्रक्रिया के लिए कम से कम 21 दिन का समय दिया जाता है।
निविदा के मुताबिक पहला कार्य नए मेला ग्राउंड और राजीव लोचन मंदिर क्षेत्र से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत 380.67 लाख रुपये है। दूसरा कार्य संत समागम स्थल और कुलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र में होना है, जिसकी लागत 225.33 लाख रुपये तय की गई है। दोनों ही कार्यों के लिए 5-5 लाख रुपये की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट रखी गई है।
इतने कम समय में टेंडर निपटाने को लेकर जानकार सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह प्रक्रिया पहले से तय एजेंसियों के पक्ष में की जा रही है। राजिम कुंभ कल्प कोई अचानक तय हुआ आयोजन नहीं है, फिर इमरजेंसी जैसी स्थिति क्यों बनाई गई, इस पर भी संदेह जताया जा रहा है।
मामले में गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके का कहना है कि उन्हें मौखिक निर्देश मिले थे, जिनके पालन में टेंडर जारी किया गया।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बालोद में प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के टेंडर को लेकर भी ऐसे ही सवाल उठे थे, जहां टेंडर फाइनल होने से पहले ही काम शुरू हो गया था। अब राजिम कुंभ कल्प के टेंडर को लेकर भी वही आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह “जंबूरी पार्ट-2” तो नहीं।



