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मूसलाधार बारिश और तूफान से मक्के की फसल तबाह, खेतों में बिछे पौधे

गौरगांव-राजापड़ाव क्षेत्र में आधे से अधिक किसानों की फसल प्रभावित, सर्वे और मुआवजे की मांग

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  1. मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राजापड़ाव, गौरगांव समेत आसपास के गांवों में तेज तूफान के कारण खेतों में खड़ी मक्के की फसल बड़े पैमाने पर जमीन पर बिछ गई है। अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को अब भारी नुकसान की आशंका सता रही है।

 

तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसल को पहुंचाया नुकसान

 

राजापड़ाव और गौरगांव क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान मक्के की खेती पर निर्भर हैं। किसानों के मुताबिक इस वर्ष फसल की स्थिति बेहतर थी और उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन लगातार बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने कई खेतों में खड़ी मक्के की फसल को जड़ से झुका दिया।

 

स्थानीय किसानों का कहना है कि क्षेत्र के आधे से अधिक किसानों के खेतों में मक्के के पौधे जमीन पर गिर चुके हैं। कई स्थानों पर फसल पूरी तरह खेत में बिछी नजर आ रही है।

 

एक बार गिरने के बाद पौधों के संभलने की उम्मीद कम

 

किसानों के अनुसार मक्के की फसल में तेज हवा और बारिश से पौधे गिर जाने के बाद नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो जाता है। जमीन पर गिरे पौधे दोबारा पहले की तरह सीधे खड़े नहीं हो पाते। इससे पौधों के विकास और भुट्टे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है।

 

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते फसल का नुकसान कम नहीं हुआ तो खेतों में गिरे पौधों के सड़ने से नुकसान और बढ़ सकता है। ऐसे में कई किसानों के सामने पूरी फसल खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।

 

कर्ज लेकर तैयार की थी फसल, अब मुआवजे की उम्मीद

 

किसानों ने बताया कि मक्का की खेती के लिए उन्होंने खाद, बीज और कृषि कार्यों पर काफी खर्च किया है। कई किसानों ने कर्ज लेकर भी फसल तैयार की थी। ऐसे में फसल खराब होने पर उनके सामने आर्थिक संकट गहराने की चिंता है।

 

प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन के साथ कृषि और राजस्व विभाग से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तत्काल टीम भेजकर खेतों का मौका निरीक्षण और फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए। किसानों ने नुकसान के आधार पर नियमानुसार सहायता और मुआवजा दिलाने की मांग की है, ताकि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई में उन्हें राहत मिल सके।

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