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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी लोहारी-लिटीपारा सड़क: बनते ही उखड़ी डामर, जिम्मेदारों की ‘चुप्पी’ ने खोली पोल!

तरुण नागेश / गरियाबंद 

गरियाबंद | विकास के दावों के बीच सरकारी खजाने की लूट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत लोहारी से लिटीपारा जाने वाले मार्ग का निर्माण इन दिनों भारी भ्रष्टाचार का शिकार हो चुका है। जमीनी हकीकत देखकर यह साफ पता चलता है कि यह सड़क जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि ठेकेदारों और भ्रष्ट अधिकारियों की जेबें भरने के लिए बनाई जा रही है।

सड़क बन कम रही है, उखड़ ज्यादा रही है

स्पष्ट जानकारी के अनुसार, इस 9.9 किलोमीटर लंबी सड़क की लागत 1 करोड़ 34 लाख 41 हजार रुपये है। अभी सड़क का संधारण कार्य चल ही रहा है, लेकिन आलम यह है कि सड़क बनते ही उखड़ने लगी है। नई-नवेली सड़क पर अभी से बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं। जनता हैरान है कि यह सड़क बन कम रही है और उखड़ ज्यादा रही है। घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का खामियाजा इलाके के मासूम ग्रामीण भुगत रहे हैं।

जिम्मेदार मौन: SDO विनय हिरवानी पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस पूरे खेल में सबसे संदिग्ध भूमिका मॉनिटरिंग अधिकारी SDO विनय हिरवानी की है। उनकी निगरानी में इतना बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन वे पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। आखिर जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं? क्या यह ठेकेदारों के साथ उनकी सीधी मिलीभगत का नतीजा है? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि रक्षा करने वाला SDO ही भ्रष्टाचार पर आंखें मूंद ले, तो आम जनता न्याय की गुहार लगाने किसके पास जाए?

जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम की एंट्री ने खोली सिस्टम की पोल

अधिकारियों की इस ‘रहस्यमयी चुप्पी’ के बीच मामले में जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा किया है। NEWS VEB की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सिस्टम पर सीधा प्रहार करते हुए कहा:

“मैंने PMGSY के उच्च अधिकारियों को उसी समय अवगत कराया था जिस समय इस सड़क का निर्माण हो रहा था। मैंने खुद गुणवत्ताहीन सड़क निर्माण का वीडियो बनाकर PMGSY के उच्च अधिकारियों को भेजा था। इसके बावजूद कोई संज्ञान नहीं लिया गया और ठेकेदार द्वारा उसी घटिया सड़क की सिर्फ लीपापोती (मरम्मत) कर दी गई।”

पूरे जिले में चल रहा है गुणवत्ताहीन काम

संजय नेताम ने आगे बताया कि यह भ्रष्टाचार सिर्फ एक सड़क तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, जिलें में कई जगह सड़क निर्माण कार्य जारी है जहां गुणवत्ताहीन तरीके से निर्माण हो रहा है, फिर भी जांच अधिकारियों द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।

 इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। जब एक जनप्रतिनिधि के वीडियो सबूत देने के बावजूद प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है, तो आम आदमी की क्या बिसात? अब देखना होगा कि इस बड़े खुलासे के बाद क्या शासन-प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागकर ठेकेदार और SDO पर कोई ठोस कार्रवाई करता है।

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