नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश की राजनीति और छात्र आंदोलन एक बार फिर गरमाने लगा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 25 जुलाई 2026 को इस्तीफ़े के बाद भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस न लेने के आरोपों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दोबारा सड़क पर उतरने का ऐलान किया है।

सीजेपी ने घोषणा की है कि वह 5 सितंबर 2026 को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर तक एक शांतिपूर्ण युवा मार्च निकालेगी। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफ़आईआर वापस लेने के अपने वादे को अब तक पूरा नहीं किया है।

पार्टी के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को आयोजित “संसद चलो मार्च” के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद आंदोलन में शामिल कई लोगों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की गई थीं।

सीजेपी का दावा है कि 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़े के साथ केंद्र सरकार ने उनकी कई मांगों पर सहमति जताई थी।

इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी शामिल थी। हालांकि, पार्टी का आरोप है कि इस संबंध में अब तक न तो कोई लिखित समझौता हुआ है और न ही प्रभावित लोगों को मुआवज़ा दिया गया है।

सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार 25 जुलाई को किए गए वादों को लागू करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के खिलाफ मामलों की वापसी को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा युवाओं से किए गए वादों को पूरा न करने के कारण उसकी नेशनल वर्किंग कमेटी ने आंदोलन फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।

सीजेपी के मुताबिक, 5 सितंबर को होने वाले मार्च का नेतृत्व नीट प्रभावित छात्रों और कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों द्वारा किया जाएगा।

इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। पार्टी का कहना है कि अदालत में केंद्र सरकार ने यह माना है कि गैर-आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी पर विचार किया जा सकता है।

सीजेपी ने सरकार से अपने वादे जल्द पूरा करने की मांग करते हुए कहा है कि युवाओं के धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।