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चर्चा का विषय बदलने का प्रयास है यह तो…

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सुष्मिता साहू
राजनीति में राजनीतिक दलों को जब लगता है कि किसी मुद्दे के चर्चा का केंद्र बनने से उसको राजनीतिक नुकसान हो सकता है तो वह क्या करते है,

वह जिस मुद्दे पर ज्यादा चर्चा होने की संभावना होती है,उस मुद्दे पर चर्चा ही न हो इसके लिए वह उस मुद्दे की जगह ऐसा दूसरा मुद्दा चर्चा के लिए ले आते हैं कि लोग ज्यादा चर्चित होने वाले मुद्दे की जगह कोई विवादास्पद मुद्दा उठा देते हैं ताकि राजनीतिक दलों ने नेताओं की बीच एक मुद्दे की जगह दूसरे मुद्दे का चर्चा होेने लगे। कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने यही किया है।

छत्तीसगढ़ में हुए कम से कम २८०० और ज्यादा से ज्यादा ३५०० करोड़ रुपए के शराब घोटाले में ईडी ने अदालत में २९८०० पन्नों का परिवाद किया है और इसमें बताया गया है कि कैसे कांग्रेस सरकार के समय में सत्ता,सिस्टम व सिंडीकेट ने सुनियोजित तरीके से शराब घोटाला किया और इसका पैसा पार्टी फंड के अलावा किस किस को मिला है।

साफ जाहिर की ईडी के शराब घोटाले पर परिवाद पेश करने के बाद इस पर प्रमुखता से चर्चा होती तो इसमें अफसरों,कांग्रेस नेताओं,नेताओं के समर्थकों के सिंडीकेट में शामिल लोगों की भी खूब चर्चा होती और इस बात की खुलकर चर्चा होती है कि जिस राजनीतिक दल ने जनता ने जनहित व राज्यहित के काम के लिए सत्ता सौंपी थी, उसने जनहित व राज्यहित का आड़ में २८०० करोड़ का शराब घोटाला कर कैसे जनता के भरोसे की हत्या की है।

लोकतंत्र में संगठित रूप से भ्रष्टाचार करना अपराध तो है लेकिन उससे बड़ा अपराध जनता के भरोसे की हत्या करना है और यही बड़ा अपराध भूपेश बघेल की सरकार के समय योजना बनाकर किया गया है, भूपेश बघेल के लिए सबसे बुरी बात इस मामले में उनके बेटे की गिरफ्तारी है। यानी शराब घोटाले की चर्चा होगी तो भूपेश बघेल के बेटे ने क्या किया है, कैसे किया है, इस बात की भी खूब चर्चा होगी।यही भूपेश बघेल नहीं चाहते थे कि शराब घोटाले और उनके बेटे के नाम की राज्य में ईडी के परिवाद पेश करने से हो।

ईडी के शराब घोटाले पर परिवाद पेश करने से किस किस को कितना पैसा मिला है, यह साफ हो जाने से इस बात की खूब चर्चा होती, यह चर्चा न हो इसलिए भूपेश बघेल ने पं.प्रदीप मिश्रा व पं. धीरेंद्र शास्त्री पर ऐसा बयान दिया कि उस पर ज्यादा चर्चा हो। धीरेंद्र शास्त्री ने तो उनके बार में पहले से कुछ कहा भी नहीं।

भूपेश बघेल ने इस मामले में पहल की उन्होंने पहले यह कहा कि धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा लोगों को गुमराह कर रहे हैं,मुगलों के शासन में हिंदू ज्यादा सुरक्षित थे। हिंदू राष्ट्र का ढोंग रचाकर भाजपा तीन बार सत्ता मे आ गई। धीरेंद्र शास्त्री समझ रहे थे जब उनसे भूपेश बघेल के आरोपों के बारे में सवाल पूछा गया वह जवाब देंगे तो विवाद होगा। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा भी कि हम नेताओं के आरोपों का कोई जवाब नहीं देते। फिर भी हमें एक बात कहनी चाहिए कि हिंदू लोगों को जोडऩा हनुमान भक्ति हैं, राष्ट्रवाद के प्रति लोगों को जगाना जिनको अंधविश्वास लगता है उनको देश छोड़ देना चाहिए।

इसके बाद फिर से भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए पं. धीरेंद्र शास्त्री के बार में कहा कि वह छत्तीसगढ़ में पैसा बटोरने आते हैं,वह बीजेपी के एजेंट के रूप में काम करते हैं।

वे कोई धर्माचार्य नहीं है,वह हिंदू समाज व सनातन के धर्मगुरु नही है,वह कथावाचक हो सकते है, वह टोना टोटका करने वाले बाबा हो सकते हैं,वे किसी शास्त्र के मान्यताप्राप्त पीठ के पीठाधीश्वर नहीं है।भूपेश बघेल ने धीरेंद्रशास्त्री को चुनौती भी दी कि वह प्रदेश के मठमंदिरों में बैठे साधु महात्माओं के साथ शास्त्रार्थ करके दिखाएं। भूपेश बघेल जानते थे कि इस पर खूब विवाद होगा, भाजपा वाले भी इस मुद्दे पर खूब बोलेंगे इसलिए उन्होंने निरंतर धीरेंद्र शास्त्री के बारें मे खूब बोला।

हुआ भी ऐसा ही। भाजपा वालों ने उसी मुद्दे पर खूब बोला जिस मुद्दे पर भूपेश बघेल चाहते थे कि खूब चर्चा हो। मीडिया में इस बात का भी खूब हल्ला किया गया कि धीरेंद्र शास्त्री राज्य सरकार के विमान से कैसे आए।टीएस सिंहदेव ने भी इस दौरान यह कहकर आग में घी डालने का काम किया कि कई धर्मगुरु वाकई लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं।

कुल मिलाकर विवाद पैदा करने के लिए धीरेंद्र शास्त्री के बार में बहुत कुछ ऐसा कहा गया जो कहा नहीं जाना चाहिए था। इस विवाद के चलते शराब घोटाले के परिवाद पर कोई चर्चा ही नहीं हुई यही भूपेश बघेल चाहते थे और ऐसा ही हुआ है।

भूपेश बघेल ने तात्कालिक रूप से जो ठीक समझा वही किया लेकिन वह यह भूल गए कि इसका दीर्घकालिक रूप से उऩको राजनीतिक नुकसान होगा।

वह अभी भले ही धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना कर, हिंदू साधु संतों की आलोचना कर राहुलगांधी को खुश करें, शराब घोटाले पर चर्चा न होने दें लेकिन उनका याद रखना चाहिए कि बिहार चुनाव के पहले धीरेंद्र शास्त्री का लालू परिवार ने भी खूब इसी तरह विरोध किया था, उनके बारे में अनापशनाप कहा गया था, चुनाव का परिणाम लाालू परिवार के लिए कितना बुरा रहा यह आज लालू परिवार बखूबी जानता है। उसे पता नहीं है कि वह इतनी बुरी तरह चुनाव क्यों हारा लेकिन पीएम मोदी की तरह धीरेंद्र शास्त्री को बुरा कहने पर उनके प्रति आस्था रखने वाले लोग बुरा मानते हैं और ऐसे लोगों को वह माफ नहीं करते हैं जो धीरेंद्र शास्त्री को बुरा कहते हैं।

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