विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता संगोष्ठी, तनाव और अकेलेपन से निपटने के बताए उपाय

रायपुर। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर उर्मिला फाउंडेशन ने राजधानी में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर विशेष संगोष्ठी आयोजित की।
कार्यक्रम में बढ़ते तनाव, अवसाद, अकेलेपन और सामाजिक दबाव जैसी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
फाउंडेशन की डायरेक्टर नम्रता सिंह ने कहा कि पढ़ाई, करियर, रिश्तों और भविष्य की चिंता युवाओं में मानसिक दबाव बढ़ा रही है। कई लोग अपनी परेशानियां किसी से साझा नहीं कर पाते और भीतर ही भीतर संघर्ष करते रहते हैं। ऐसे में परिवार, मित्र या भरोसेमंद व्यक्ति से मन की बात कहना बेहद जरूरी है।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने आसपास ऐसे लोगों पर ध्यान दें, जो अचानक शांत रहने लगे हों या सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगे हों। समय रहते संवाद स्थापित करने और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने से गंभीर परिस्थितियों को टाला जा सकता है।
संगोष्ठी के विशेष सत्र में डॉ. विनोद सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हैं।
सुख-सुविधाओं के बजाय मजबूत पारिवारिक रिश्ते, सामाजिक जुड़ाव, सम्मान, भरोसा और सकारात्मक सोच खुशहाल जीवन की नींव हैं।
डॉ. सिंह ने सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करने और लगातार आगे निकलने की होड़ को तनाव का बड़ा कारण बताया। उन्होंने योग, ध्यान, संवाद और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालने की सलाह दी।
कार्यक्रम के समापन पर उर्मिला फाउंडेशन की महिला पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे रायपुर के विभिन्न वार्डों और बस्तियों में पहुंचकर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाएंगी तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए सक्रिय रूप से कार्य करेंगी।



