टीस की संवेदना और हण्डा के लोक रंगों से सजा ‘रंग परब’ का समापन

रायपुर। संस्कृति विभाग की ‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला का समापन हिंदी नाटक ‘टीस’ और छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य ‘हण्डा’ की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के साथ हुआ। मुक्ताकाशी मंच पर कलाकारों ने अभिनय, संवाद और लोकशैली के जरिए दर्शकों को भावनाओं के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक सरोकारों से जोड़ा।
आचार्य रंजन मोडक, लोकेश साहू एवं साथियों ने ‘टीस’ में मानवीय संवेदनाओं और जीवन के संघर्षों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं श्री चंद्रशेखर चकोर के निर्देशन में गुड़ी चऊंरा दल ने ‘हण्डा’ के जरिए छत्तीसगढ़ी लोकभाषा, ग्रामीण जीवन और परंपराओं की जीवंत झलक दिखाई।
संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि रंगमंच सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर दिखाने और लोगों को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने वाली सशक्त विधा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
समापन अवसर पर साहित्यकार विजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार दीपेंद्र दीवान, सामाजिक कार्यकर्ता उदयभान चौहान सहित संस्कृति विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे।



