41वें चक्रधर समारोह का भव्य आगाज, कला-साधना की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का रामलीला मैदान में भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल रमेन डेका ने महाराजा चक्रधर सिंह के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह समारोह महज सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
राज्यपाल ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया। संगीत, नृत्य और साहित्य को संरक्षण देकर उन्होंने रायगढ़ घराने के कथक को देश-दुनिया में पहचान दिलाई। उनकी रचनाएं नर्तन सर्वस्व, तालतोय निधि और राग रत्न मंजूषा आज भी महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
समारोह में पद्मश्री डॉ. उषा बारले, पद्मश्री अनुज शर्मा सहित कई कलाकारों ने प्रस्तुति दी। वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने गणेश वंदना से पहली शाम को भक्तिमय बनाया। गायन, तबला, पखावज, बांसुरी, वायलिन और घुंघरू वादन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाओं और ग्रंथों के संरक्षण व प्रकाशन को सांस्कृतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी रखा गया है।
लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने समारोह को रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृति समाज की आत्मा और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति है।
14 से 23 सितंबर तक चलने वाले आयोजन में देश-प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच मिलेगा।


