युवाओं के दिल पर बढ़ रहा खतरा, उर्मिला हॉस्पिटल में विशेषज्ञों ने किया जागरूक

रायपुर। बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव और खानपान की गलत आदतों के बीच युवाओं में बढ़ते हृदय रोग चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इसी को लेकर विश्व हृदय दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में हृदय रोग जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें शहर के विभिन्न वर्गों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। विशेषज्ञों ने हृदय को स्वस्थ रखने, हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों की पहचान और बचाव के उपायों की जानकारी दी।
25 से 35 वर्ष के युवाओं में भी बढ़ रही परेशानी
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ एवं गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. जिनेश जैन उपस्थित रहे। वे वर्तमान में उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अस्पताल के संचालक डॉ. विनोद सिंह ने की।
डॉ. जिनेश जैन ने कहा कि हृदय रोग अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। कम उम्र के युवाओं में भी उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास प्रतिदिन 25 से 35 वर्ष की उम्र के ऐसे युवा मरीज पहुंच रहे हैं, जिनका ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है। यह स्थिति भविष्य में गंभीर हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकती है।
तनाव, जंक फूड और नींद की कमी बढ़ा रहे जोखिम
डॉ. जैन ने बताया कि हृदय रोगों के पीछे पारिवारिक इतिहास, अत्यधिक मानसिक तनाव, अनियमित नींद, धूम्रपान, शराब का सेवन, फास्ट फूड और जंक फूड जैसी आदतें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भोजन में अधिक नमक और सोडियम का सेवन तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी दिनचर्या में सुधार करें और नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच कराएं। खासकर युवाओं को हृदय रोगों के जोखिम को गंभीरता से लेते हुए समय रहते जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि सीने में भारीपन, दबाव या जलन, गर्दन, जबड़े अथवा कंधे में दर्द, असामान्य पसीना आना, सांस फूलना और थोड़ी शारीरिक गतिविधि में अत्यधिक थकान महसूस होना हृदय संबंधी समस्या के संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि सीने में अचानक दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी अथवा ठंडा पसीना जैसे संभावित हार्ट अटैक के लक्षण हों, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
मरीजों के इलाज के साथ जागरूकता भी जरूरी : डॉ. विनोद सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनोद सिंह ने कहा कि उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना ही नहीं, बल्कि लोगों को बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करना भी है। समय पर जानकारी, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है।
डॉ. जिनेश जैन को हृदय रोग के क्षेत्र में जटिल मामलों के उपचार और सैकड़ों सफल प्रक्रियाओं का अनुभव बताया गया। कार्यशाला के माध्यम से लोगों को हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
स्वस्थ हृदय के लिए अपनाएं ये आदतें
विशेषज्ञों ने स्वस्थ हृदय के लिए प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलने, योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करने, संतुलित एवं फाइबर युक्त भोजन लेने तथा तेल, घी और नमक का सीमित उपयोग करने की सलाह दी।
इसके अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेने, तनाव को नियंत्रित रखने और धूम्रपान से दूर रहने पर जोर दिया गया। लोगों को समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की भी सलाह दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



