
गरियाबंद। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, गरियाबंद द्वारा आयोजित ‘मूलनिवासी जुराव’ कार्यक्रम में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित बघेल शामिल हुए।
उन्होंने आदिवासी एवं मूलनिवासी छत्तीसगढ़िया समाज की संस्कृति, भाषा, पहचान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी।
अमित बघेल ने कहा कि “हमर पुरखा मन जो सपना छत्तीसगढ़ राज बनाये के बेरा देखे रहिस, वो छत्तीसगढ़ राज तब बनही जब छत्तीसगढ़िया मन खुद नीति बनाही अउ खुद राज करही।
” उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन केवल भौगोलिक सीमाओं के लिए नहीं, बल्कि यहां के मूलनिवासी समाज की पहचान, अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा के उद्देश्य से भी हुआ है।
वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर के संघर्ष को किया याद
अमित बघेल ने छत्तीसगढ़ के इतिहास का उल्लेख करते हुए शहीद वीर नारायण सिंह और वीर गुंडाधुर के संघर्ष को याद किया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में छत्तीसगढ़ की माटी के वीरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाया है।
हसदेव आंदोलन का किया जिक्र
हसदेव अरण्य में जंगल कटाई के विरोध में किए गए अपने आंदोलन का जिक्र करते हुए अमित बघेल ने कहा कि वे इस आंदोलन के दौरान छह महीने जेल में रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हमर मूलनिवासी छत्तीसगढ़िया भाई-बहनों के हक-अधिकार के लिए छह जन्म भी जेल में रहना पड़े, तो मुझे मंजूर है।”
उन्होंने जल, जंगल और जमीन को आदिवासी समाज की जीवन-व्यवस्था, संस्कृति और अस्तित्व का आधार बताया। साथ ही समाज से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।
वोट की ताकत समझने की अपील
कार्यक्रम में अमित बघेल ने चुनावी राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं के वोट को छोटे-छोटे प्रलोभनों से प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को अपने वोट की वास्तविक ताकत समझनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक दल मतदाताओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करने की स्पष्ट योजना क्यों नहीं बताते।
उन्होंने समाज से अपील की कि लोग अपने अधिकारों, संस्कृति, भाषा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लें।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। ‘मूलनिवासी जुराव’ कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और मूलनिवासी समाज के अधिकारों के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा।


