
रायपुर। बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के खिलाफ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर अब तक प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ नाराज है। संघ ने इसके विरोध में 18 अगस्त को बेमेतरा कलेक्टर कार्यालय का शांतिपूर्ण घेराव करने का निर्णय लिया है।
संघ का कहना है कि कर्मचारियों की ओर से जिला प्रशासन और शासन के समक्ष पहले ही शिकायत एवं ज्ञापन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इनमें महिला सुरक्षा, कार्यस्थल की गरिमा, निर्धारित कार्य दायित्व, वेतन, CHO के साथ कथित भेदभाव और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। संघ के मुताबिक अपेक्षित समय में ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है।
महिला कर्मचारियों से जुड़े गंभीर आरोप
संघ के अनुसार शिकायतों में समीक्षा बैठकों के दौरान महिला कर्मचारियों के प्रति कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां, अभद्र भाषा के प्रयोग, लेजर लाइट डालकर असहज करने तथा बिना अनुमति स्पर्श या अनुचित तरीके से पास बुलाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
संघ ने स्पष्ट किया कि ये आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं और इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकता है। संघ ने महिला कर्मचारियों की शिकायतों की जांच POSH Act, 2013 के प्रावधानों के तहत सक्षम समिति या प्राधिकरण से कराने की मांग की है।
CHO संवर्ग को अपमानित करने का भी आरोप
संघ के मुताबिक शिकायतों में CHO की योग्यता और पद का कथित रूप से सार्वजनिक रूप से उपहास करने, अन्य संवर्गों से अपमानजनक तुलना करने तथा समीक्षा बैठकों में CHO संवर्ग को ही कार्यों और कमियों के लिए जिम्मेदार ठहराने के आरोप भी शामिल हैं।
इसके अलावा CR/APAR खराब करने, नौकरी समाप्त कराने, FIR कराने अथवा अन्य कार्रवाई की धमकी दिए जाने और संघ पदाधिकारियों को लक्षित किए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
निर्धारित TOR के विपरीत कार्य लेने का आरोप
संघ ने आरोप लगाया है कि NHM के निर्धारित Community Health Officer (CHO) Terms of Reference (TOR) के बावजूद CHO से अन्य संवर्गों से संबंधित कार्य भी लिए जा रहे हैं। संस्थागत प्रसव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और अन्य विभागीय गतिविधियों को लेकर CHO पर कथित रूप से अतिरिक्त दबाव बनाए जाने की शिकायत है।
संघ की मांग है कि CHO, ANM, MPW, RHO सहित सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों से उनके निर्धारित TOR और विभागीय दायित्व के अनुसार ही कार्य लिया जाए।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन का मुद्दा
संघ ने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हित से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता से भी संबंधित है। संघ के अनुसार समीक्षा बैठकों, फील्ड विजिट, स्वास्थ्य मेलों, विशेष अभियानों और सर्वेक्षण जैसी गतिविधियों में एकल पदस्थ CHO को बाहर भेजे जाने से कुछ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की नियमित सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति बनती है।
संघ ने मांग की है कि ऐसी स्थिति में वैकल्पिक मानव संसाधन और ड्यूटी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि OPD, दवा वितरण, NCD स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य परामर्श तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य जैसी सेवाएं बाधित न हों।
वेतन और मुख्यालय निवास को लेकर भी शिकायत
संघ ने मुख्यालय निवास के संबंध में मौखिक दबाव, सेवा समाप्ति अथवा कार्रवाई की धमकी और कुछ कर्मचारियों का वेतन रोके जाने की शिकायत भी उठाई है। संघ ने मांग की है कि बिना स्पष्ट एवं विधिसम्मत प्रक्रिया के रोके गए वेतन के मामलों की जांच कर लंबित वेतन जारी किया जाए।
संघ की प्रमुख मांगें
संघ ने CMHO बेमेतरा के खिलाफ उच्च स्तरीय, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच समिति गठित करने की मांग की है। जांच की निष्पक्षता के लिए जांच अवधि में CMHO को वर्तमान पद से हटाने या अन्यत्र पदस्थ करने की मांग भी रखी गई है।
इसके अलावा महिला कर्मचारियों की शिकायतों की POSH Act के तहत जांच, CHO से निर्धारित TOR के अनुसार कार्य लेने, सभी संवर्गों से समान एवं निष्पक्ष व्यवहार करने, शिकायतकर्ता कर्मचारियों और संघ पदाधिकारियों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने तथा आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
दो सप्ताह का अल्टीमेटम, आगे ‘काम बंद–कलम बंद’ आंदोलन की चेतावनी
संघ ने कहा है कि 18 अगस्त के घेराव के बाद यदि दो सप्ताह के भीतर CMHO को हटाने या अन्यत्र पदस्थ करने, उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच शुरू करने और महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन तेज किया जाएगा।
इसके अगले चरण में ‘काम बंद–कलम बंद’ आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी गई है।
संघ के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि संगठन शासन और प्रशासन से टकराव नहीं चाहता, बल्कि गंभीर शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई चाहता है। संघ ने स्वास्थ्य मंत्री और राज्य शासन से मामले में तत्काल संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय जांच के निर्देश देने की अपील की है।
संघ ने कहा, “महिला सम्मान से समझौता नहीं, कर्मचारियों की गरिमा से समझौता नहीं और जनता की स्वास्थ्य सेवाओं से समझौता नहीं।”



