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खरीफ 2026: 1 एकड़ पर 2 बोरी यूरिया, 10 एकड़ पर 16 बोरी खाद का प्रावधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने खरीफ सीजन 2026 के लिए उर्वरक वितरण की नई कार्ययोजना जारी कर दी है।

विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इस वर्ष किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के आधार पर यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरक का वितरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य उर्वरकों का संतुलित एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि वास्तविक किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके।
विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2025 में वितरित उर्वरक मात्रा को आधार मानते हुए इस वर्ष प्रति एकड़ 2 बोरी यूरिया के मानक का 80 प्रतिशत तथा प्रति एकड़ ।

बोरी डीएपी/एनपीके के मानक का 60 प्रतिशत वितरण किया जाएगा। कृषि विभाग ने इसके लिए विस्तृत गणना तालिका भी जारी की है, जिससे किसानों और सहकारी समितियों को उर्वरक वितरण में सुविधा होगी।
रकबे के अनुसार होगा उर्वरक वितरण छत्तीसगढ़ शासन DAPNPK नई व्यवस्था के तहत 1 एकड़ भूमि वाले किसान को 2 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी अथवा एनपीके मिलेगा।

वहीं 5 एकड़ भूमि वाले किसान को 8 बोरी यूरिया तथा 3 बोरी डीएपी/एनपीके प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार 10 एकड़ रकबे वाले किसान को 16 बोरी यूरिया और 6 बोरी डीएपी/एनपीके का वितरण किया जाएगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि दशमलव गणना में यदि अंतिम मान 1.49 तक आता है तो उसे नीचे की पूर्ण संख्या माना जाएगा, जबकि 1.50 या उससे अधिक होने पर अगली पूर्ण संख्या के आधार पर उर्वरक वितरण किया जाएगा।
किसानों की श्रेणी के अनुसार वितरण व्यवस्था
कृषि विभाग ने किसानों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है-
सीमांत किसान (2.5 एकड़ तक):
इन किसानों को उर्वरक का वितरण एकमुश्त किया जाएगा ताकि उन्हें खेती के प्रारंभिक कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
लघु किसान (2.5 से 5 एकड़ तक):
इन किसानों को उर्वरक दो किस्तों में दिया जाएगा। दूसरी किस्त पहली किस्त के 20 दिन बाद उपलब्ध कराई जाएगी।
दीर्घ किसान (5 एकड़ से अधिक):
इस श्रेणी के किसानों को उर्वरक तीन समान किस्तों में वितरित किया जाएगा। प्रत्येक किस्त के बीच 20 दिनों का अंतर रखा जाएगा।
सीमांत और लघु किसानों को प्राथमिकता
विभाग ने निर्देश दिया है कि सीमांत एवं लघु किसानों को प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों और समितियों को वितरण प्रक्रिया का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था उर्वरकों की कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर अंकुश लगाने के साथ-साथ जरुरतमंद किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने में सहायक साबित होगी।

राज्य सरकार द्वारा खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए यह पहल किसानों को राहत देने और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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