अपराध / हादसाछत्तीसगढ़

**”फोन पर बोला- मुझे पीटा गया है… अगली सुबह मिली मौत की खबर”

बहन ने खोला संदिग्ध मौत का मामला, एसपी से लगाई न्याय की गुहार**

मैनपुर । क्षेत्र में 28 वर्षीय युवक आकाश कश्यप की संदिग्ध मौत अब पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर रही है। मृतक की बहन आकांक्षा कश्यप ने पुलिस अधीक्षक गरियाबंद को आवेदन सौंपते हुए दावा किया है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई घटना है, जिसकी निष्पक्ष जांच और अपराध दर्ज किया जाना आवश्यक है।

क्या है पूरा मामला? आवेदन के अनुसार, 30 जून 2026 की शाम करीब 7:35 बजे आकाश कश्यप की अपनी बहन से अंतिम बार फोन पर बातचीत हुई। बातचीत के दौरान उसने कथित रूप से बताया कि देव निषाद और उसके 3-4 साथियों ने उसके साथ मारपीट की है।

इसके अगले दिन 1 जुलाई की सुबह करीब 7 बजे आकाश की मौत की सूचना परिवार को मिली। अचानक हुई इस मौत के बाद परिजनों ने इसे संदिग्ध बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे, लेकिन नहीं हुई सुनवाई आकांक्षा कश्यप का आरोप है कि 2 जुलाई को वह मैनपुर थाना पहुंचीं और संज्ञेय अपराध बताते हुए एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया। लेकिन थाना पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया और यह कहकर वापस भेज दिया कि “अभी एफआईआर दर्ज नहीं होगी।”

एसपी को सौंपा आवेदन थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक गरियाबंद को BNSS-2023 की धारा 173(4) के तहत आवेदन सौंपा। आवेदन में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया मामला संदेहास्पद है, इसलिए अपराध पंजीबद्ध कर वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए

थाना प्रभारी पर भी लगाए गंभीर आरोप आवेदन में आरोप लगाया गया है कि समय पर एफआईआर दर्ज नहीं होने से जांच प्रभावित हो सकती है और महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट होने की आशंका बढ़ गई है। बहन ने थाना प्रभारी मैनपुर के खिलाफ कथित लापरवाही और वैधानिक कर्तव्यों की अनदेखी की विभागीय जांच की भी मांग की है।

आवेदन में की गई प्रमुख मांगें चरण 1: BNSS की धारा 173(4) के तहत तत्काल अपराध दर्ज किया जाए।चरण 2: संदिग्ध मौत की जांच किसी वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारी को सौंपी जाए।चरण 3: उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।चरण 4: घटना से जुड़े सभी भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए।चरण 5: एफआईआर दर्ज नहीं करने के आरोप में थाना प्रभारी की विभागीय जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जाए।चरण 6: पुलिस अधीक्षक स्वयं प्रकरण की निगरानी कर पीड़ित परिवार को निष्पक्ष न्याय दिलाएं।

अब निगाहें पुलिस पर यह मामला अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच चुका है। देखना होगा कि आवेदन पर क्या निर्णय लिया जाता है, क्या अपराध पंजीबद्ध होता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

अस्वीकरण: यह समाचार पीड़ित पक्ष द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच एजेंसियों द्वारा सत्यापन अभी शेष है।

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