छत्तीसगढ़

राजापड़ाव में गूंजा अधिकारों का संकल्प: हजारों आदिवासियों ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा की शपथ, 3 जुलाई को SDM को सौंपेंगे ज्ञापन

गरियाबंद: विकासखंड मैनपुर के राजापड़ाव क्षेत्र स्थित ग्राम कोकड़ी गुरुवार को उस समय जनआंदोलन का केंद्र बन गया, जब जय अंबेडकरवादी युवा संगठन और किसान संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में हजारों मूलनिवासी, किसान, महिलाएं, युवा, जनप्रतिनिधि और ग्राम सभा पदाधिकारी एक मंच पर जुटे। बैठक में जल, जंगल, जमीन और संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा को लेकर सामूहिक संकल्प लिया गया तथा प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण और क्षेत्रीय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद प्रतिभागियों ने पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की समीक्षा की और पेसा अधिनियम तथा वनाधिकार कानून, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कानून ग्राम सभाओं को सर्वोच्च अधिकार देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर वन विभाग और प्रशासन ग्राम सभाओं तथा वनाधिकार समितियों को विश्वास में लिए बिना निर्णय ले रहे हैं। इसे संविधान की भावना और आदिवासी अधिकारों की अनदेखी बताया गया।

ग्रामीणों ने वनाधिकार पट्टों में वर्षों से हो रही देरी पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि आठ से दस वर्ष पहले किए गए व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों की सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद पात्र हितग्राहियों को आज तक अधिकार पत्र नहीं मिले हैं। केवल तकनीकी आधारों और 2005 की सैटेलाइट इमेजरी का हवाला देकर दावों को निरस्त किया जा रहा है, जबकि पीढ़ियों से भूमि पर उनका पारंपरिक अधिकार रहा है।

बैठक में वन विभाग द्वारा किए गए परिसीमन (सीमांकन) का भी विरोध किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी पारंपरिक देव-सीमा को ही मान्यता देते आए हैं और ग्राम सभा की सहमति के बिना किसी भी नए सीमांकन को स्वीकार नहीं करेंगे।सिर्फ वनाधिकार ही नहीं, बल्कि शिक्षा, पेयजल, बिजली और कृषि से जुड़े मुद्दे भी बैठक के केंद्र में रहे। वक्ताओं ने मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अधूरे भवनों, शिक्षकों की कमी, विद्यालयों में अनियमित उपस्थिति, बंद पड़े सोलर सिस्टम, विफल नल-जल योजना और आदिम जाति सेवा सहकारी समिति शोभा में किसानों को हो रही परेशानियों पर चिंता जताई। साथ ही यह भी कहा गया कि पूर्व में किए गए प्रशासनिक आश्वासनों पर अब तक अमल नहीं हुआ है।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 3 जुलाई को एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम मैनपुर को विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में सात दिनों के भीतर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में पहुंचकर ग्राम सभाओं, वनाधिकार समितियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित कर समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी। यदि तय समय में ठोस पहल नहीं हुई तो एसडीएम कार्यालय का शांतिपूर्ण घेराव किया जाएगा।

जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि संविधान और कानून से मिले अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है और जब तक उन्हें व्यवहार में लागू नहीं किया जाएगा, तब तक लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।

शोभा ग्राम पंचायत के सरपंच घनश्याम मरकाम ने कहा कि क्षेत्र के विकास और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी ग्राम पंचायतें एकजुट हैं और समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के अध्यक्ष पतंग मरकाम ने आरोप लगाया कि राजापड़ाव क्षेत्र लंबे समय से विकास और मूलभूत सुविधाओं की उपेक्षा झेल रहा है। उन्होंने कहा कि अब मूलनिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर निर्णायक लड़ाई लड़ेगा।

बैठक के समापन पर हजारों लोगों ने सामूहिक शपथ लेते हुए जल, जंगल, जमीन, संविधान, पेसा अधिनियम और वनाधिकार कानून से प्राप्त अधिकारों की रक्षा करने, जंगलों के संरक्षण, पारंपरिक संस्कृति को सुरक्षित रखने तथा ग्राम सभा की संवैधानिक शक्तियों की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करने का संकल्प लिया।

बैठक में जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, सरपंच घनश्याम मरकाम, जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के अध्यक्ष पतंग मरकाम, उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम परदे, सचिव नकुल नागेश सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button