मैनपुर/गरियाबंद। संतान के सुखद, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना को लेकर माताओं ने कमरछठ (हलषष्ठी) का व्रत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रखा। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोहरापदर में इस अवसर पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से सगरी का निर्माण कर भगवान शिव-पार्वती और षष्ठी माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
कमरछठ के अवसर पर महिलाएं दिनभर उपवास रखकर संतान की सुख-समृद्धि और उनकी रक्षा की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी की जन्मजयंती से भी माना जाता है। इसी वजह से इसे हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।
ललिता तिवारी के निवास पर जुटीं महिलाएं
गोहरापदर में शिक्षिका ललिता तिवारी के निवास पर कमरछठ व्रत के लिए क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित हुईं। महिलाओं ने घर के आंगन में पारंपरिक तरीके से गड्ढा बनाकर सगरी तैयार की। सगरी में जल भरने के बाद बेर, पलाश, महुआ और कांसी की डालियां स्थापित की गईं।
इसके बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की और षष्ठी माता की कथा सुनी। पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाज और धार्मिक आस्था का माहौल बना रहा
।पसहर चावल और छह प्रकार की भाजी का किया सेवन
कमरछठ व्रत की परंपरा में हल से जुते हुए अनाज का सेवन नहीं किया जाता। व्रत पूर्ण होने के बाद माताओं ने पारंपरिक रूप से पसहर चावल और छह प्रकार की भाजियों का सेवन कर उपवास खोला। इस दौरान महिलाओं ने संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की
सामूहिक पूजा में शामिल हुईं महिलाएं
गोहरापदर में आयोजित कमरछठ व्रत एवं कथा-पूजन में ममता तिवारी, ललिता तिवारी, खुशबू तिवारी, आशा मिश्रा, तमन्ना सिन्हा, मनीषा कश्यप, सोनम सिन्हा, सत्यवती सिन्हा, धामनबाई साहू, सुनीता कश्यप, त्रिदेवी साहू, एकता सिन्हा, संतोषी यादव, चंद्रिका प्रधान, टिकेश्वर ठाकुर, हिरंदी पाण्डेय, गायत्री पाण्डेय, अनीता पांडेय, पुष्पा नामदेव और पुष्पा जालेश सहित अंचल की अनेक महिलाएं मौजूद रहीं।
पारंपरिक विधि से हुए इस सामूहिक आयोजन ने गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। महिलाओं ने पूजा-अर्चना के साथ एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



