Follow Us on Our Social Media
छत्तीसगढ़
Trending

लड़ेंगे मरेंगे के नारे के साथ किया ग्रामीणों ने सुशासन तिहार के मंच में प्रवेश

Follow Us on Our Social Media

गरियाबंद। जिले के दूरस्थ अंचल गोना में आयोजित समाधान शिविर उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब मंच पर लगी कुर्सियां खाली रह गईं और गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके, पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर सहित जनप्रतिनिधि व अधिकारी ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते नजर आए। प्रशासन का यह संवेदनशील और सहज व्यवहार ग्रामीणों के बीच चर्चा का केंद्र बना रहा।

यह पहली बार था जब जिले के वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि सीधे ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद करते दिखाई दिए।

शिविर में करीब आठ ग्राम पंचायतों से पहुंचे ग्रामीण “हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते” के नारे लगाते हुए रैली के रूप में पहुंचे और अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं।

ग्रामीणों ने 17 प्रमुख मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से मूलभूत सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों ने बिजली विहीन गांवों में शीघ्र विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने, शोभा क्षेत्र के अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ नियुक्त करने, अधूरी नल-जल योजना को पूर्ण करने, स्कूल जतन योजना के अधूरे भवनों को पूरा कराने और जर्जर सड़कों की मरम्मत की मांग प्रमुखता से उठाई।

इसके अलावा वन अधिकार पट्टा प्राप्त हितग्राहियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग भी ग्रामीणों ने एक स्वर में रखी। किसानों ने पेट्रोल और डीजल की कमी से खेती-किसानी प्रभावित होने की समस्या भी अधिकारियों के सामने रखी।

किसानों का कहना था कि समय पर ईंधन उपलब्ध नहीं होने से कृषि कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

समाधान शिविर में जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, एसडीएम हितेश्वरी बाघे और तहसीलदार सुशील कुमार भोई सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे। कई मामलों में अधिकारियों ने मौके पर ही निर्देश देकर त्वरित कार्रवाई शुरू कराई।

ग्रामीणों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि अधिकारी गांवों तक पहुंचकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने और समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।

पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। शिविर के दौरान ग्रामीणों का एक ही संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि वे अपने अधिकार और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, किसी प्रकार की दया नहीं।

Related Articles

Back to top button