एक फोन कॉल… और रक्तदान के लिए पहुंच गए पत्रकार, गर्भवती महिला की बची जान

बसना। एक फोन कॉल पर मिली जानकारी ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
पता चला कि एक गर्भवती महिला को तत्काल रक्त की जरूरत है। बिना उसकी पहचान या परिवार के बारे में पूछे पत्रकार राजकुमार अग्रवाल मदद के लिए पहुंच गए और रक्तदान किया।
13 सितंबर 2026 को राजकुमार अग्रवाल ने 12वीं बार रक्तदान किया। उनका रक्त जरूरतमंद गर्भवती महिला के लिए जीवनरक्षक बना। उन्होंने कहा कि रक्तदान व्यक्ति की पहचान देखकर नहीं, बल्कि जरूरत देखकर किया जाना चाहिए।
छोटा-सा प्रयास किसी मां की जिंदगी बचाने के साथ उसके बच्चे को मां का स्नेह और परिवार को खुशियां लौटा सकता है।
राजकुमार अग्रवाल की यह पहल समाज को संदेश देती है कि रक्तदान केवल दान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी है। जब किसी अनजान की मदद के लिए बिना स्वार्थ आगे बढ़ा जाए, तभी इंसानियत की असली पहचान सामने आती है।
एक कॉल… एक रक्तदाता… और जिंदगी बचाने की कोशिश। यही सोच समाज में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की प्रेरणा देती है।



