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ऑपरेशन ‘सेफ पैसेज’ से वन्यजीव तस्करी नेटवर्क ध्वस्त, दो बाघों की खाल के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

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गरियाबंद | मध्य भारत के सबसे अहम टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा को बड़ी मजबूती देते हुए वन विभाग और केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। ‘ऑपरेशन सेफ पैसेज‘ के तहत हुई इस कार्रवाई में दो बाघों की खाल के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि जांच के दौरान पैंगोलिन के करीब पांच किलोग्राम शल्क भी बरामद किए गए हैं।

यह अभियान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) की एंटी-पोचिंग यूनिट ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल तथा गरियाबंद पुलिस के समन्वय से चलाया। कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर की गई, जिसे Wildlife Justice Commission से साझा किया गया था।

जांच में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम के रूप में हुई है। दोनों को महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर मोटरसाइकिल से दो बाघों की खाल ले जाते हुए पकड़ा गया। वन अपराध प्रकरण दर्ज कर दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इसी दौरान इंद्रावती टाइगर रिजर्व की टीम ने बीजापुर जिले से एक अन्य शिकारी तुलसीराम माज्जी को भी गिरफ्तार किया।

पूछताछ के बाद बिजेश्वर गेडाम के घर से करीब पांच किलोग्राम पैंगोलिन के शल्क बरामद हुए, जिससे यह आशंका मजबूत हुई है कि गिरोह अनुसूची-1 के कई दुर्लभ वन्यजीवों की तस्करी में भी शामिल रहा है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारी हैं, जिससे मामला और अधिक गंभीर हो गया है। अधिकारियों के अनुसार बाघों का शिकार इंद्रावती-अबूझमाड़ क्षेत्र में किया गया था, जो मध्य भारत का प्रमुख टाइगर लैंडस्केप माना जाता है।

वन अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि करीब 400 किलोमीटर लंबे उस टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा का हिस्सा है जो गढ़चिरौली, इंद्रावती, अबूझमाड़, उदंती-सीतानदी और सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य को जोड़ता है। यही कॉरिडोर बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथी, गौर और जंगली भैंस जैसी प्रजातियों के सुरक्षित आवागमन और आनुवंशिक संपर्क को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वन विभाग के मुताबिक यह पहली बड़ी सफलता नहीं है। वर्ष 2023 में भी इसी क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाकर दो बाघों की खाल बरामद की गई थी, जबकि अप्रैल 2026 में अबूझमाड़ क्षेत्र में नौ भारतीय विशाल गिलहरियों का शिकार करने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से संगठित शिकारियों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगा है और टाइगर कॉरिडोर में बाघों की आवाजाही के प्रमाण भी बढ़े हैं।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति आगे भी जारी रहेगी। विभाग का मानना है कि खुफिया सूचना आधारित कार्रवाई, विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय और वैज्ञानिक रणनीति के माध्यम से ही संगठित वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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