
महासमुंद। करीब 1.5 करोड़ रुपये के एलपीजी गैस गबन मामले में महासमुंद पुलिस की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। फरार आरोपियों को शरण और अन्य तरह की मदद देने वाले लोगों तक अब जांच का दायरा पहुंच गया है। इसी कड़ी में मुंबई के चार लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया गया था, जो गुरुवार को जांच टीम के सामने पेश हुए।
पुलिस के मुताबिक, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर सार्थक सिंह ठाकुर की फरारी के दौरान सहायता करने के आरोप में जोगेंद्र सिंह, राजू माइकल, राकेश साह और प्रशांत पाटिल को नोटिस जारी किया गया था। पूछताछ के दौरान आरोपियों को उपलब्ध कराई गई आर्थिक, तकनीकी और अन्य प्रकार की सहायता के संबंध में जानकारी जुटाई गई।
जांच में सामने आया है कि जब्त किए गए छह गैस कैप्सूलों से करीब 92 मीट्रिक टन एलपीजी गैस निकालकर लगभग 90 लाख रुपये में बेची गई थी। इसके बाद पूरे मामले को वैध दर्शाने के लिए कथित तौर पर फर्जी पंचनामा और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए।
दस्तावेजों और वजन रिकॉर्ड में मिलीं गंभीर गड़बड़ियां
पुलिस जांच के अनुसार, तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर पर गैस की मात्रा का आकलन करने के बाद उसे खपाने की साजिश रचने का आरोप है। रायपुर निवासी मनीष चौधरी के माध्यम से ठाकुर पेट्रोकेमिकल से संपर्क कर करीब 90 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था।
जांच एजेंसियों को दस्तावेजों और वजन रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां मिली हैं, जिससे फर्जीवाड़े और कूटरचना की आशंका और मजबूत हुई है। इसके अलावा आरोपियों के बीच कथित गोपनीय बैठकों और एक जैसे बयान देने की रणनीति बनाए जाने के संकेत भी जांच में मिले हैं।
कई आरोपी न्यायिक हिरासत में
इस मामले में तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव, भाजपा नेता पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी तथा ठाकुर पेट्रोकेमिकल के जिम्मेदार पदाधिकारियों समेत कई आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि मुंबई से पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों से मिले इनपुट के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है तथा मामले में नए नाम भी सामने आ सकते हैं।
महासमुंद के बहुचर्चित एलपीजी गैस गबन मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस अब उन सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों को संरक्षण या सहयोग प्रदान किया।


