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छत्तीसगढ़

कभी नक्सलियों का खौफ था, आज लगा कलेक्टर-एसपी का दरबार! कमारभौदी में 22 मामलों का ‘ऑन द स्पॉट’ फैसला

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गरियाबंद के अति-संवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाके कमारभौदी से एक बेहद अहम खबर सामने आई है। जहां कभी बंदूकों के साए में दहशत पलती थी, वहां आज जिला प्रशासन ने विकास की एक बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है।

लंबे समय बाद जिला प्रशासन की पूरी टीम—जिसमें खुद कलेक्टर श्री बी.एस. उइके और पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर शामिल थे—इस दुर्गम वनांचल ग्राम में पहुंची। गांव वालों के लिए यह एक चौंकाने वाला मामला था क्योंकि सालों से विकास की राह देख रहे ग्रामीणों के दरवाजे पर पूरा का पूरा सरकारी अमला खुद चलकर आया था।

31 मार्च 2026: खौफ का अंत शिविर के मंच से कलेक्टर श्री उइके ने बताया कि 31 मार्च 2026 को देश के साथ-साथ गरियाबंद जिला भी आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो चुका है। इस दहशतगर्दी के खात्मे के तुरंत बाद, प्रशासन ने अब उन दुर्गम इलाकों को ‘टारगेट’ किया है, जो अब तक विकास और सरकारी योजनाओं से महरूम थे।

फाइलों का तुरंत निपटारा शिविर में ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, पानी, आंगनबाड़ी और अस्पताल जैसी 27 बुनियादी समस्याओं के आवेदन अधिकारियों के सामने रखे। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए 22 मामलों का मौके पर ही निपटान कर दिया। बाकी बचे 5 बड़े प्रकरण (जैसे डुमरबाहरा में नया उपस्वास्थ्य केंद्र खोलना और बिजली विस्तार) शासन स्तर पर तत्काल प्रभाव से भेजे गए हैं।

स्वास्थ्य से लेकर सम्मान तक: इस शिविर में सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि जमीनी स्तर पर काम दिखा:

  • दुर्गम इलाके में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच की गई।
  • खुद कलेक्टर और एसपी ने स्वास्थ्य स्टॉल पर जाकर अपना बीपी और शुगर चेक कराया।
  • बुजुर्गों को छड़ी, मछुआरों को जाल-आइस बॉक्स बांटे गए, और गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की गई।

जनपद अध्यक्ष श्री सोहन ध्रुव और जिला पंचायत सदस्य श्री संजय नेताम सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया है कि प्रशासन अब सीधे गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। यह शिविर कमारभौदी के लिए सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है।

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