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मेरा बच्चा बचा लो सरकार” : मलद्वार बिना जन्मे कमार परिवार के मासूम की जिंदगी पर संकट

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गरियाबंद/मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के ग्राम बेहराडीह में रहने वाला विशेष पिछड़ी कमार जनजाति का एक गरीब परिवार अपने तीन वर्षीय बेटे युवराज के इलाज के लिए पिछले तीन वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। जन्म से ही बच्चे का मलद्वार नहीं होने के कारण वह गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। परिवार ने अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मदद की अपील की है।जन्म से गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चे युवराज का जन्म मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। जन्म के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा “एनोरेक्टल मालफॉर्मेशन” बीमारी से पीड़ित है। तत्काल उसे जिला अस्पताल और फिर रायपुर रेफर किया गया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार इलाज नहीं करा सका। फिलहाल बच्चे के पेट में पाइप लगाकर अस्थायी व्यवस्था की गई है।म

मजदूरी कर पाल रहे परिवार युवराज के पिता फलेश नेताम और माता धनेश्वरी नेताम मजदूरी और बांस के बर्तन बनाकर परिवार चलाते हैं। परिवार में पांच सदस्य हैं। इलाज के लिए उन्होंने घर का सामान तक बेच दिया, लेकिन महंगे इलाज के कारण आगे उपचार नहीं हो पाया।

हर निवाले पर तड़पता है बच्चा
परिजनों के अनुसार युवराज भरपेट भोजन भी नहीं कर पाता। थोड़ा खाने पर उल्टी हो जाती है और रातभर दर्द से तड़पता रहता है। बच्चे की हालत देखकर माता-पिता और ग्रामीण बेहद परेशान हैं।

अधिकारियों से लगाई गुहार परिवार ने स्थानीय अधिकारियों, कमार विकास परियोजना, जिला चिकित्सा अधिकारियों और कलेक्टर कार्यालय तक आवेदन दिया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर मदद नहीं मिल रही।

क्या बोले डॉक्टर

मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. गजेन्द्र ध्रुव ने कहा कि बच्चे को “एनोरेक्टल मालफॉर्मेशन” बीमारी है और इसका इलाज संभव है। उन्होंने मामले की जानकारी लेकर आवश्यक पहल करने की बात कही।

जनपद सदस्य ने उठाई मदद की मांग जनपद सदस्य सुकचंद ध्रुव ने कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी कई अधिकारियों को दी है, लेकिन अब तक कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने राज्य सरकार से बच्चे के इलाज के लिए तत्काल आर्थिक और चिकित्सीय मदद देने की मांग की है।

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