भालू के हमले से घायल ग्रामीण को नदी ने रोका रास्ता, स्ट्रेचर पर पार कराई गई नदी
कामेपुर में दो भालुओं ने किया हमला, गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को बारिश के बीच बाइक से नदी तक लाया गया; पुल नहीं होने से सामने आई स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत

गरियाबंद। जिले के ग्राम कामेपुर में खेत की ओर जा रहे एक ग्रामीण पर दो भालुओं ने अचानक हमला कर दिया। वन्यजीव के हमले में ग्रामीण के पेट, सीने और गुप्तांग में चोटें आईं। ग्रामीणों ने किसी तरह उसे बचाया, लेकिन अस्पताल पहुंचाने की राह में एक दूसरी बड़ी चुनौती सामने खड़ी थी—गांव के पास नदी पर पुल नहीं होना।
घटना के बाद घायल को तत्काल अस्पताल ले जाने की कोशिश शुरू हुई। बारिश के बीच परिजन और ग्रामीण घायल को बाइक के सहारे करीब दो किलोमीटर दूर नदी तक लेकर पहुंचे। नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण 108 एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।
स्ट्रेचर बना सहारा, ग्रामीणों ने पार कराई नदी
आपात स्थिति में ग्रामीणों और 108 एंबुलेंस की टीम ने मिलकर घायल को स्ट्रेचर पर रखा और नदी पार कराई। इस दौरान 108 एंबुलेंस के चालक योगेश साहू और एमटी हेमंत साहू ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर घायल को सुरक्षित नदी के दूसरी ओर पहुंचाने में मदद की।
बरसते पानी के बीच स्ट्रेचर को लेकर नदी पार करने के बाद घायल को 108 एंबुलेंस से गरियाबंद अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
भालू के हमले से ज्यादा भारी पड़ा पुल का अभाव?
यह घटना केवल वन्यजीव हमले की नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में ग्रामीण इलाकों की जमीनी चुनौतियों की तस्वीर भी सामने लाती है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण बरसात में गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। किसी दुर्घटना, गंभीर बीमारी या वन्यजीव के हमले जैसी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज या घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए इस तरह जोखिम उठाने की नौबत न आए।



