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छत्तीसगढ़

अब टाइगर रिजर्व में दिखेगा ‘जंगल का उड़ता राजदूत’: उदंती-सीतानदी में शुरू होगी हार्नबिल सफारी, आदिवासी गांवों को मिलेगा नया रोजगार

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गरियाबंद | 21 जून छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अब केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ पक्षियों के दीदार के लिए भी नई पहचान बनाने जा रहा है। वन विभाग ने यहां ‘हार्नबिल सफारी’ शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह पहल राज्य में पहली बार प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक पर्यटन को एक साथ जोड़ने वाली परियोजनाओं में शामिल होगी।

इस सफारी का सबसे बड़ा आकर्षण होगा प्राकृतिक आवास में मालाबार पाइड हार्नबिल का सहज दर्शन। पिछले कुछ वर्षों में इस दुर्लभ पक्षी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके पीछे लगातार एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और फलदार वृक्षों के संरक्षण जैसी पहलें अहम रही हैं।

आदिवासी गांव बनेंगे इको-टूरिज्म की नई पहचान टाइगर रिजर्व के ओढ़, अमलोर और आमामोरा जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय (PVTG) गांव इस परियोजना के केंद्र में हैं। स्थानीय युवाओं को बर्ड वॉचिंग और हार्नबिल गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि पर्यटन बढ़ने के साथ उन्हें स्थायी रोजगार मिल सके।वन विभाग का मानना है कि संरक्षण तभी सफल होता है, जब स्थानीय समुदाय उसकी अगुवाई करे। यही मॉडल अब हार्नबिल सफारी के जरिए जमीन पर उतारा जा रहा है।

सिर्फ पक्षी नहीं, वन्यजीवों का भी मिलेगा रोमांचसफारी के दौरान पर्यटक हार्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, वुडपेकर, बाबलर और कई प्रवासी पक्षियों को भी देख सकेंगे। इसके साथ ही इंडियन जायंट स्क्विरल और इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी इस क्षेत्र का आकर्षण हैं

रायपुर से ढाई घंटे की दूरी पर नया पर्यटन केंद्र राजधानी रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तक सड़क मार्ग से करीब ढाई घंटे में पहुंचा जा सकता है। फिलहाल सफारी के लिए दो जिप्सी उपलब्ध कराई गई हैं और आने वाले समय में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।वन विभाग को उम्मीद है कि हार्नबिल सफारी न केवल छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म को नई ऊंचाई देगी, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और वन संरक्षण के बीच एक सफल मॉडल भी स्थापित करेगी।

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