रेफर-दर-रेफर के बीच थमी ग्रामीण की सांसें, अमलीपदर के निजी क्लीनिक पर उठे सवाल
अमलीपदर से देवभोग और फिर धर्मगढ़ ले जाते समय हुई मौत, निजी क्लीनिक के उपचार पर परिजनों ने उठाए सवाल

गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड के इंदागांव थाना क्षेत्र के ग्राम सराईपानी निवासी डिगने यादव की इलाज के दौरान मौत का मामला सामने आया है। परिजनों के अनुसार, सामान्य बुखार की शिकायत के बाद शुरू हुआ इलाज धीरे-धीरे अस्पतालों के बीच रेफर किए जाने की प्रक्रिया में बदल गया। आखिरकार गंभीर हालत में ओडिशा के धर्मगढ़ ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद अमलीपदर क्षेत्र में संचालित एक निजी क्लीनिक में किए गए इलाज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इलाज में लापरवाही या दवाओं के कारण हालत बिगड़ने की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
निजी क्लीनिक में इलाज के बाद बिगड़ी हालत
परिजनों के मुताबिक डिगने यादव को बुखार आने के बाद अमलीपदर के एक निजी क्लीनिक में उपचार के लिए ले जाया गया था। आरोप है कि वहां उन्हें आर्टीसुनेट इंजेक्शन समेत कई दवाएं दी गईं। परिजनों का कहना है कि उपचार के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और स्थिति लगातार गंभीर होती गई।
इसी दौरान मरीज की हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें अमलीपदर के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। अब सवाल यह उठ रहा है कि शुरुआती उपचार के दौरान मरीज की स्थिति गंभीर होने के संकेत मिलने पर उसे समय रहते उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर क्यों नहीं किया गया।
अमलीपदर से देवभोग और फिर धर्मगढ़ तक दौड़
सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे देवभोग रेफर किया। परिजनों के अनुसार, वहां से भी बेहतर उपचार के लिए मरीज को ओडिशा के धर्मगढ़ अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।
मरीज को लेकर परिजन धर्मगढ़ के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही डिगने यादव की हालत और बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम गईं।
इलाज के तरीके पर उठे कई सवाल
घटना के बाद परिजन उपचार की प्रक्रिया और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी तो शुरुआती स्तर पर आवश्यक जांच और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई।
परिजनों ने यह भी मांग की है कि निजी क्लीनिक में किए गए उपचार, मरीज को दी गई दवाओं और इंजेक्शनों तथा उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की जाए।
त्योहार के दिन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल
घटना के दौरान जन्माष्टमी का पर्व होने के कारण देवभोग में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी परिजनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गंभीर मरीज को समय पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी था।
हालांकि, इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
जांच से साफ होगी इलाज की पूरी तस्वीर
डिगने यादव की मौत के वास्तविक कारण और उपचार में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, यह स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इसके लिए निजी क्लीनिक की उपचार पर्ची, मरीज को दी गई दवाओं का रिकॉर्ड, इंजेक्शन संबंधी विवरण और सरकारी अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड की जांच अहम होगी।
फिलहाल एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है और अब उसकी नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच पर है। यदि उपचार में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ सकती है।



