छत्तीसगढ़ में संक्रामक रोगों पर शोध को मिलेगी नई गति, IGKV में अत्याधुनिक BSL-3 लैब स्थापित
जूनोटिक रोगों की निगरानी, वैक्सीन और उपचार संबंधी अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा; ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को भी मिलेगी मजबूती

रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान और जैव-सुरक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलने जा रही हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर परिसर में स्थापित अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) प्रयोगशाला संक्रामक रोगों की पहचान, उनके वैज्ञानिक अध्ययन और रोकथाम से जुड़े अनुसंधान को नई दिशा देगी।
इससे वैक्सीन एवं उपचार संबंधी शोध, उन्नत नैदानिक तकनीकों के विकास और रोगों की निगरानी की क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और जैव-प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों पर भी होगा अध्ययन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ में इस प्रकार की अत्याधुनिक वैज्ञानिक सुविधा का विशेष महत्व है।
बीएसएल-3 प्रयोगशाला के माध्यम से पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों के अध्ययन एवं निगरानी को गति मिलेगी। विशेष रूप से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों की पहचान, वैज्ञानिक अध्ययन और उनसे निपटने की तैयारियों को मजबूती मिल सकेगी।
प्रयोगशाला में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित वातावरण उपलब्ध होगा। इससे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन, उन्नत जांच तकनीकों तथा वैक्सीन और उपचार संबंधी अनुसंधान के अवसर मिलेंगे। साथ ही, गंभीर संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान और संभावित रोग प्रकोप से निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को मिलेगा बढ़ावा
मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के आपसी संबंधों को ध्यान में रखते हुए विकसित ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को मजबूत बनाने में भी यह प्रयोगशाला अहम साबित हो सकती है। इससे कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच समन्वय बढ़ाने के साथ रोगों की निगरानी और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
28 सितंबर को हुआ था लोकार्पण
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत इस बीएसएल-3 प्रयोगशाला की स्थापना की गई है। इसका लोकार्पण 28 सितंबर को किया गया था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
शोध और प्रशिक्षण की क्षमताएं होंगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास में पहले से महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मृदा, जल, फसल अवशेषों और अन्य नमूनों के परीक्षण एवं अनुसंधान में भूमिका निभा रही है। नई बीएसएल-3 प्रयोगशाला से विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी।
इस सुविधा से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्रयोगशाला तकनीशियनों और संबंधित विशेषज्ञों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के अवसर भी मिलेंगे।
इससे राज्य में कुशल वैज्ञानिक मानव संसाधन विकसित करने और आधुनिक अनुसंधान तकनीकों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रयोगशाला भविष्य में संक्रामक रोग अनुसंधान, रोग निगरानी, जैव-सुरक्षा तथा पशु एवं जूनोटिक रोगों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अधोसंरचना बनेगी। इससे छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा मिलने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।



