उदंती के जंगल में दिखा ‘रंगों का जादूगर’ : कुल्हाड़ीघाट की सड़क पर नजर आया भारतीय गिरगिट, जैव विविधता का अनोखा संदेश


गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुल्हाड़ीघाट में उस समय राहगीर ठिठक गए, जब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र की सड़क पर एक भारतीय गिरगिट (Indian Chameleon) धीरे-धीरे चलते हुए दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया।भारतीय गिरगिट अपनी रंग बदलने की अद्भुत क्षमता के कारण प्रकृति के सबसे अनोखे सरीसृपों में गिना जाता है। हालांकि आम लोगों में इसे लेकर कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित हैं, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह विषैला नहीं होता और इंसानों से दूरी बनाए रखना ही पसंद करता है।
जंगल की सेहत का संकेत
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गिरगिट की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि क्षेत्र का प्राकृतिक आवास अभी भी स्वस्थ और जैव विविधता से भरपूर है। यह कीटभक्षी जीव खेतों और जंगलों में हानिकारक कीड़ों की संख्या नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उदंती-सीतानदी की समृद्ध जैव विविधता
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व केवल बाघों और बड़े वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ पक्षियों, सरीसृपों और छोटे जीवों का भी महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है। कुल्हाड़ीघाट में भारतीय गिरगिट का दिखाई देना इस समृद्ध जैव विविधता का एक और प्रमाण माना जा रहा है।
क्या करें यदि गिरगिट दिखे? वन्यजीवों को छेड़ने, पकड़ने या नुकसान पहुंचाने के बजाय उन्हें सुरक्षित रास्ता देना चाहिए। यदि कोई वन्यजीव संकट में दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को देना सबसे उचित कदम है।

