
पुरी। ओडिशा की पवित्र नगरी पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। रथ निर्माण स्थल ‘रथखला’ में रूपकार, महराणा (बढ़ई) और सेवायत दिन-रात जुटे हुए हैं, ताकि निर्धारित समय पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के भव्य रथ पूरी तरह तैयार हो सकें। इस वर्ष 16 जुलाई 2026 को महाप्रभु अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे।
रथ निर्माण कार्य के तहत तीनों रथों के लिए कुल 12 दुआर बेढ़ा (दरवाजे के ढांचे) और 12 कणी फौड़ा का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इन्हें रथ के विभिन्न हिस्सों में इस प्रकार स्थापित किया जाएगा कि रंग-बिरंगे वस्त्रों से ढके जाने के बाद रथों का गोलाकार स्वरूप सुरक्षित रहे और कपड़ों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।
इसके अलावा रथों के वेदी भाग के चारों ओर पारुस पटा लगाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अगले चरण में खपुरी, पाराभाड़ी और पोटल जैसे ऊपरी हिस्सों को रथों पर स्थापित किया जाएगा। वहीं, रथों पर देवी-देवताओं की नक्काशी, बड़े कलश की स्थापना, उलट शुआ (तोते की आकृति) लगाने तथा वेदी सिंहासन के निर्माण का कार्य भी तेजी से जारी है।
रथ के घोड़ों और सारथी की मरम्मत एवं रंग-रोगन का कार्य अंतिम चरण में है। साथ ही कनक मुंडी पर पीतल की चादर लगाने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है।
महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा की विश्व प्रसिद्ध घोषयात्रा को लेकर पुरी में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। सदियों पुरानी परंपराओं के अनुरूप हर कार्य को समय पर पूरा करने के लिए प्रशासन, सेवायत और कारीगर पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जुटे हुए हैं।



