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उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में अब मिलेगा तेज़ और पारदर्शी मुआवज़ा, “गजसंकेत” ऐप हुआ अपग्रेड

गरियाबंद | 26 मई 2026छत्तीसगढ़ के Udanti Sitanadi Tiger Reserve में मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित ग्रामीणों को अब मुआवज़े के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने “CG Elephant Alert App – गजसंकेत” को अपग्रेड कर ऑनलाइन मुआवज़ा प्रबंधन प्रणाली से जोड़ दिया है, जिससे फसल नुकसान, मानव घायल/मृत्यु, संपत्ति क्षति और मवेशी हानि जैसे मामलों में डिजिटल प्रक्रिया के जरिए तेज़ राहत मिल सकेगी।

नई व्यवस्था के तहत ग्रामीणों को अलग से ऐप इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होगी। वनरक्षक (Forest Guard) स्वयं ऑनलाइन दावा दर्ज करेंगे और जरूरी दस्तावेज व फोटो पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। दावा प्रक्रिया के हर चरण — रेंजर, पटवारी, एसडीओ, डीएफओ और ट्रेजरी स्तर तक — SMS और WhatsApp अलर्ट भेजे जाएंगे। प्रशासन ने दावा प्रस्तुत होने से लेकर ट्रेजरी तक भेजने की समय-सीमा 30 दिन तय की है।

फिलहाल इस पोर्टल का ट्रायल रन जारी है और फील्ड स्तर पर कार्यरत पटवारियों, वनरक्षकों और रेंज अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले महीने इसका औपचारिक शुभारंभ प्रस्तावित है।

प्रशासन के अनुसार, नई डिजिटल प्रणाली से मुआवज़ा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय होगा और प्रभावित ग्रामीणों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी। ग्रामीण अपने दावों की रियल-टाइम ट्रैकिंग भी कर सकेंगे।

गजसंकेत” ऐप को मूल रूप से हाथियों की गतिविधियों की अग्रिम सूचना देने और मानव-हाथी संघर्ष कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। मार्च 2023 में शुरू किए गए इस ऐप को अब Madhya Pradesh, Maharashtra, Jharkhand, Telangana, Karnataka और Odisha जैसे राज्यों ने भी अपनाया है।

वन विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित यह पहल वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और प्रशासन के बीच भरोसा मजबूत करेगी और वन्यजीव संरक्षण को भी नई दिशा देगी

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