गुरु नानक की स्मृतियों से जुड़ी गढ़फुलझर धरा, अब PM मोदी को भूमिपूजन का न्योता

बसना। गुरु नानक देव जी की स्मृतियों से जुड़े बसना विकासखंड के गढ़फुलझर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की पहल तेज हो गई है।
बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल और कार सेवा प्रमुख जत्थेदार साहेब सिंह करनाल वाले के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर राजभवन में राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की। इस दौरान प्रस्तावित नानक सागर साहिब गुरुद्वारा के नवनिर्माण के भूमिपूजन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का आग्रह किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को प्रधानमंत्री के नाम आमंत्रण पत्र भी सौंपा। विधायक डॉ. अग्रवाल ने राज्यपाल को गढ़फुलझर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक पृष्ठभूमि की जानकारी दी।
संगत की मान्यता के अनुसार गुरु नानक देव जी अपनी प्रथम उदासी के दौरान अमरकंटक और शिवरीनारायण होते हुए जगन्नाथपुरी की यात्रा पर निकले थे। इसी यात्रा के दौरान उनके गढ़फुलझर पहुंचने और तत्कालीन भैना शासक राजा सागर चंद मानस राज के यहां प्रवास की मान्यता है।
धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक धरोहर भी
गढ़फुलझर सिख संगत के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। संगत के अनुसार यहां की खसरा नंबर 688 की भूमि राजस्व अभिलेखों में श्री गुरु नानक देव जी के नाम दर्ज होने का उल्लेख मिलता है।
इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए कार सेवा के माध्यम से नानक सागर साहिब गुरुद्वारा और थड़ा साहिब के भव्य विकास की योजना बनाई गई है।
गढ़फुलझर की पहचान केवल धार्मिक विरासत तक सीमित नहीं है। यहां अभेद किला, गुप्त सुरंगें, रानी महल और मानसरोवर जैसे ऐतिहासिक अवशेष भी मौजूद हैं। गुरुखाप और नानक सागर साहिब समेत आसपास के कई स्थल गुरु नानक देव जी की स्मृतियों से जुड़े बताए जाते हैं।
विधायक डॉ. अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भूमिपूजन होने से गढ़फुलझर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। इससे धरोहर संरक्षण, धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
प्रतिनिधिमंडल में हरिकिशन सिंह, मुखविंदर सिंह रंधावा, अमृत पाल सिंह ओबेरॉय और नानक सागर साहिब छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रभारी रोमी सलूजा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।



